मुख्य मेनू खोलें

प्रसन्ना-(जन्म 1951), प्रमुख भारतीय रंगमंच निर्देशक और नाटककार। वह एक आधुनिक कन्नड़ थिएटर के अग्रदूत और् नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के स्नातक है। वह कर्नाटक की नाट्य संस्था समुदाय के संस्थापक है। सातवे दशक मैं प्रसन्ना ने कन्नड़ रंगमंच को एक रचनात्मक दिशा दी। वह एक कन्नड़ नाटककार, उपन्यासकार और कवि भी है। प्रसन्ना अपने सांगठनिक कौशल और नए विचारों के लिए रंगमंच मैं जाने जाते हैं।[1]

Prasanna
जन्म 10 फ़रवरी 1951 (1951-02-10) (आयु 68)
कर्णाटक
व्यवसाय मंच निदेशक

प्रसन्ना को निर्देशन के लिये संगीत नाटक अकादमी सम्मान मिला है। आपने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के लिए नाटकों का निर्देशन किया है। प्रसन्ना ने निनासम, रंगमंडल-भोपाल, रन्गाय और भारत के कई थियेटर संगठनों के साथ काम किया है।

मुख्य निर्देशित नाटकसंपादित करें

गिरीश कर्नाड का तुगलक, गांधी, गैलीलियो की लाइफ, बेर्तोल्त ब्रेस्त् का साहसी माँ और उसके बच्चे, आचार्य तारतूफ, लाल घास पर नीले घोड़े (अनुवाद -उदय प्रकाश), एक लोक कथा, फ्युजियामा, उत्तर राम चरित्र[2], विलियम शेक्सपियर का हेमलेट, उदय प्रकाश की कहानी पर तिरिछ, सीमा पार ; भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जिन्दगी पर नाटक।[3]

दृश्य मीडिया के लिए कार्यसंपादित करें

  • वृत्त चित्र -एक विचारधारा की तलाश मै-निर्देशन -प्रसन्ना, सह निर्देशन-अरविन्द गौड़, दूरदर्शन, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए।
  • विनायक कृष्ण गोकक पर एक वृत्त चित्र का निर्माण। साहित्य अकादमी दिल्ली के लिए।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Parul Sharma. "An acting activist all the way". अभिगमन तिथि २२ दिसंबर २००८. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. अजित राय. "उत्तर रामचरित्र नाटक की समीक्षा". अभिगमन तिथि २२ दिसंबर २००८. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  3. Ankur Kalita. "The Ultimate Frontier-Prasanna's Seema Paar explores the many faces of death". अभिगमन तिथि २२ दिसंबर २००८. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें