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प्राकृतिक विधि (Natural law, or the law of nature) विधि की वह प्रणाली है जो प्रकृति द्वारा निर्धारित होती है। प्रकृति द्वारा निर्धारित होने के कारण यह सार्वभौमिक है। परम्परागत रूप से प्राकृतिक कानून का अर्थ मानव की प्रकृति के विश्लेषण के किए तर्क का सहारा लेते हुए इससे नैतिक व्यवहार सम्बन्धी बाध्यकारी नियम उत्पन्न करना होता था।

प्राकृतिक कानून की प्रायः प्रत्यक्षवादी कानून (positive law) से तुलना की जाती है। प्राकृतिक विधि प्रकृति के आदेश आत्मक नियमों का एक समूह है। या मानवी विधि का एक आदर्श है। मनुष्य द्वारा बने हुए कानून प्राकृतिक विधि के अनुसार होने चाहिए। प्राकृतिक विधि को अनेक नामों से पुकारा जाता है। यह ईश्वरीय विधि है क्योंकि यह मनुष्य द्वारा नहीं बल्कि ईश्वर द्वारा लागू की जाती है। या नैतिक विधि है क्योंकि इसके द्वारा न्याय और अन्याय का निर्णय होता है। यह एक ऐसा मापदंड है जिसके सहारे यह निश्चय किया जाता है कि मनुष्य द्वारा बना हुआ कौन सा कानून उचित है और कौन सा अनुचित। यह आलिखित विधि है क्योंकि यह विधि किसी सिला चट्टान संहिता आदि पर लिखी नहीं है या प्रकृति या ईश्वर की अंगुलियों द्वारा आदमी के दिल और दिमाग पर ही लिखी होती है। या सार्वभौमिक विधि है क्योंकि यह सभी जगहों पर सब समय में सभी व्यक्तियों या जीवो पर समान रूप से लागू होती है। या शाश्वत विधि है क्योंकि या सृष्टि के आदि से लेकर आज तक एक ही रूप में कायम है।

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