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उऩ दिनो की है , जब मैने १२ वी उत्ती्रण की थी, गॉव से निकलकर पडने के लिए २० किमी खंडवा शहर जाना पडता था। परंतु ज्यादा जानकारी न होने के कारन मुझे खंडवा कालेज न मिल सका। मुझे सनावद कालेज मिला। २१ तारीख आखिरी दिनांक थी। प्रवेश की, तो मै २० तारीख को ही सनावद के लिए निकल पडॉ। वैसे ज्यादा पैसै न होने के कारन मुझे रेल मे सफर करना था , जो कि मेरे लिए एक चुनौती से कम नही था,क्यूकि मेने पहले कभी रेल मे सफर नही किया था, पर क्या करे जाना तो था, तो मै  गॉव से खंडवा के लिए पहली ही गाडी से चल दिया, खंडवा तो जाते रहता था ,पर  चुनौती तो अब आने वाली थी , रेल का सफर जो मैने पहले कभी नही किया, बस सुना था ,कि रेल मे कोइ आवाज नही लगाता ,कि आपका शहर आ चुका है, बस यही डर रहता की कही आगे न निकल जाऊ ,खैर जो भी हो , मै रेल्वे स्टेशन पहुच गया, अब क्या था ,देखा सब टिकट ले रहै। पता नही चल रहा था , कि सनावद के लिए टिकट कहॉ से मिलेगा , एक भाई। साहब से पुछ कर टिकट तो ले लिया, प्लेटफार्म नं ़ भी पता कर लिया , अब  मै इतंजार करने लगा ,और कुछ समय बाद रेल आ गई । अब मै बर्थ पर बैठ गया , कुछ समय बाद एक महिला  आई और मुझे बर्थ से उठा दिया , और मेरी हालत देख कर वो समझ चुकी थी , कि ये इनका पहला सफर है, तो उन्होने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा ,बेटा आप आखिरी वाले डिब्बे मै बैठ जाऔ, अब रेल भी चलने वाली थी ,पर क्या करे , जाना तो था, दौडते हुए आखिरी वाले डिब्बे मै पहुचा ।और लगभग रेल चल ही दी थी, पर किसी तरह बैठ गया । अब  जगह तो जनरल कोच मै भी मिल गई । मैरे साइड मै एक लडकी बैठी थी , जो कि किसी से बात नह कर रही थी, अब मुझे याद आया की दी को भी बता दू ,कि मै बैठ चुका हू। और मै दी को पूरे दिन का वाकया सुनाने लगा, मेरी बाते सून कर लडकी हंसने लगी थी , तो मैने जल्दी ही फोन रख दिया, अब रेल चल कर स्टेशन छोड चुकी थी, मुझे डर था कि कही मै आगे न निकल जाऊ, तो हर समय पुछता रहता ,की सनावद कब आएगा,अब  लडकी से रहा न गया, और  स्कार्फ खोल कर कहने लगी , मै बता दूंगी ,परेशान मत हो, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था, कि जितनी प्यारी आवाज उससे कही ज्यादा सुंदर थी वो, खैर कुछ नही अब डर थोडा कम हो चुका था। अब अगले स्टेशन पर उसे भूख लगी , तो उसने मुझे पाव भाजी लाने को कहा ,डर तो लग रहा था , पर डरते हुए ही उतर गया क्यूंकि वो मदद जो करने वाली थी । पाव भाजी ला कर दी। और मैरे मना करने के बावजूद मुझे भी  खिलाया। और थोडी ही देर  मे हम अच्छे  दोस्त बन चुके थे। अब हमारा वक्त अच्छे से गुजर रहा था, हम एक दुसरे के बारे मे काफी कुछ शेयर कर  चुके थे। शिवाय नाम के , क्यूंकि वो चाहती  थी ,कि ये मुलाकात जिंदगी की सबसे यादगार पल हो, क्यूंकि हम एक दुसरे से जुडे रहेंगे तो, शायद मै  इस पल को भूल जाउ जो कि मै नही चाहती, और  अगर हमारी दोस्ती सच्ची होगी , तो हम फिर मिलेंगे। और इतने मे सनावद गया, उससे बिछडने का दुख हो रहा था , तो वो भी कुछ खुश नही थी, मै उतरने लगा ही था, कि उसने कहा फिर मिलेंगे। मै  जाना तो नही चाहता था ,पर मुझे पता था , कि मेरी मंजिल कुछ और है। और समय आ चुका था ,रेल का चलने का हम एक टक एक दुसरे को देखते रहै , और कुछ ही समय मै हम बिछड गए, और आज भी मै  इंदौर खंडवा रेल मे सफर करता हू, किसी दिन  वो पगली मिल जाए , जिसने मैरै पहले रेल के सफर को यादगार बनाया, कहानी वही जो दिल छु जाए। By:- Sandeep Bhagore.

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