गोरखाली कप्तान बलभद्र कुंवर अपने युवावस्था में

बलभद्र कुंवर वा बलभद्र कंवर (सन् १७८९ - सन् १८२२) एक नेपाली सैनिक कप्तान एवं देशभक्त योद्धा थे। वे नेपाल के राष्ट्रिय नायक हैं। राजा महेंद्र के निर्देशनमें कवि बालकृष्ण सम द्वारा मनोनीत नेपाल के राष्ट्रीय विभूति में से एक हैं ।

वे बाइसे गोरखा राज्य के क्षत्रिय कुँवर वंश के सरदार चन्द्रवीर कुँवर के द्वितीय पुत्र और सरदार जयकृष्ण कुँवर के नाति हैं । उनकी माता अम्बिका देवी नेपालके जिन्दा शेर उपाधि से मानेजाने वाले बडाकाजी अमर सिंह थापा के पुत्री हैं । बलभद्र अंग्रेज-नेपाल युद्ध (१८१४ से १८१६) में अपने महान सेवाओं के लिये विख्यात हैं। उस युद्घ में उनके नाना बडाकाजी अमर सिंह थापा और मामा काजी रणजोर सिंह थापा भी शामिल थे । वे शाही नेपाली सेना (गोरखाली सेना) के एक कैप्टेन थे तथा १८१४ के नालपानी के युद्ध में सेनानायक के रूप में उनको प्रसिद्धि मिली। नालपानी, देहरादून के पास स्थित है।

परिवारसंपादित करें

उनका जन्म पिता सरदार चन्द्रवीर कुँवर और माता अम्बिका देवी के दुस्रे पुत्रको रूपमा हुआ। उनका दादाजी सरदार जयकृष्ण कुँवर प्रसिद्ध सरदार रामकृष्ण कुँवरके भाइ थे।[1] उनके पिता सरदार चन्द्र वीर कुँवर काभ्रे भँवरकोटके मेंं रहते थे ।[2][3] चन्द्रवीर ने काजी रणजोर थापा की बहन से शादी की थी और[4] वे बडाकाजी अमर सिंह थापाके जमाईं थे ।[5][6]

स्रोतसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 3 फ़रवरी 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 जुलाई 2017.
  2. Regmi 1986c, पृ॰ 185.
  3. Regmi 1987a, पृ॰ 48.
  4. Acharya 1971, पृ॰ 3.
  5. Dabaral 1987b, पृ॰ 51.
  6. Regmi 1987b, पृ॰ 150.

पुस्तकसंपादित करें

  • Regmi, Mahesh Chandra (September–October 1987b), "Gorkhali Rule in Garhwal" (PDF), Regmi Research Series, 19 (9–10): 143–150, मूल से 7 अगस्त 2019 को पुरालेखित (PDF)सीएस1 रखरखाव: तिथि प्रारूप (link)

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें