बहादुर यार जंग का जन्म 3 फरवरी 1905 को हुआ था तेहरिक ए पकिस्तान के महान नेता नवाब बहादुर यार जंग अपनी साफ गोइ और सौला बयानी की वजह से मसूर थे पकिस्तान के क़ायदे-आज़म और राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना के राष्ट्रपिता के पद पर फाइज होने के बाद उन की पकिस्तान मे महान नेता के रूप मे छवि है हैदराबाद के दक्कन की तहरीक मे गैर मामूली किरदार आदा करने पर उन्हें अफताब - ए - दक्कन भी कहते है नवाब बहादुर यार जंग को पकिस्तान की जददो जहाद की वजह से अपनी खिताब और जागीर से भी हाथ-धोना पडा मगर उन्होंने उस की परवाह न कि दिन दार और दानीश मंद नवाब बहादुर यार जंग 25 जून 1944 को उन की मृत्यु हो गई! ये बहादुराबाद कराची मैं स्थित है यहाँ पर चारमीनार है। कराची का बहादुराबाद क़स्बा MIM नेता "बहादुर यार जंग" के नाम पर पड़ा था, 1948 बंटवारे के बाद MIM नेता क़ासिम रिज़वी के साथ हैदराबाद से कई मुहज़रीन कराची में जाकर बस गए और कराची में ही चारमीनार जैसी हूबहू ईमारत की तामीर करवाई।