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"बहुजन हिताय: बहुजन सुखाये:" से अभिप्राय है कि आर्यवर्त के सभी नागरीको का हित हो और सभी सुख से रहे किसी में कभी कोई भेद भाव ना हो और समाज मे जो वर्गीकरण करते है और जाति वा सम्प्रदाय के आधार पर अपने को नीचा वा अपने को उच्च मानने वालों के प्रति आचार्य चाणक्य द्वारा यह मूल्य मंत्र को बताया ताकि समाज मे एकता और अखंडता बनी रहे और भारत के सभी वर्गो मे मतभेद कभी ना हो और समाज वर्ण व्यवस्था से चले ना की जाती व्यवस्था से