बाँका जिला
बाँका ज़िला (Banka district) भारत के बिहार राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय बाँका है।[1][2]
बाँका ज़िला Banka district | |
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बिहार का ज़िला | |
![]() | |
![]() बिहार में स्थिति | |
देश | ![]() |
राज्य | बिहार |
स्थापना | 21 फरवरी 1991 |
मुख्यालय | बाँका |
ब्लॉक | 11 |
क्षेत्रफल | |
• कुल | 3020 किमी2 (1,170 वर्गमील) |
जनसंख्या (2011) | |
• कुल | 20,34,763 |
• घनत्व | 670 किमी2 (1,700 वर्गमील) |
भाषा | |
• प्रचलित | हिन्दी,अंगिका, मैथिली, संताली |
जनसांख्यिकी | |
• साक्षरता | 58.17% |
• लिंगानुपात | 907 |
समय मण्डल | भारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30) |
वेबसाइट | banka |
उपविभाग संपादित करें
बाँका ज़िले में ११ तहसीलें हैं - बाँका, रजौन, अमरपुर, धोरैया, कटोरिया, बौसी, शंभुगंज, बाराहाट, बेलहर, चांदन, तेलोन्ध फूल्लीडूमर।
मुख्य आकर्षण संपादित करें
मंदार पहाड़ी - वैसे तो यहाँ अनेक पहाड़ी है लेकिन कुछ देखने लायक है, इसमें से एक है मंदार पहाड़ी। यह पहाड़ी भागलपुर से 48 किलोमीटर की दूरी पर है, जो अब बांका जिले में स्थित है। इसकी ऊंचाई 800 फीट है। इसके संबंध में कहा जाता है कि इसका प्रयोग सागर मंथन में किया गया था। किंवदंतियों के अनुसार इस पहाड़ी के चारों ओर अभी भी शेषनाग के चिन्ह को देखा जा सकता है, जिसको इसके चारों ओर बांधकर समुद्र मंथन किया गया था। कालिदास के कुमारसंभवम में पहाड़ी पर भगवान विष्णु के पदचिन्हों के बारे में बताया गया है। इस पहाड़ी पर हिन्दू देवी देवताओं का मंदिर और अनेको मूर्तियाँ स्थित है जिसे हम पहाड़ो पर चड़ते हुए भी देख सकते है। यह भी माना जाता है कि जैन के 12वें तिर्थंकर ने इसी पहाड़ी पर निर्वाण को प्राप्त किया था। लेकिन मंदार हिल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी चोटी पर स्थित झील है। इसको देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। पहाड़ी के ठीक नीचे एक पापहरनी तलाब है, इस तलाब के बीच में एक भगवान विष्णु मन्दिर है जो इस दृश्य को और भी रोमान्चक बनाता है। यहाँ जाने के लिये भागलपुर से बस और रेलवे दोनों की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा यहाँ चंदन डैम और कोज़ी डैम भी देखने लायक है। यहाँ से देवघर और बाबा बासुकीनाथ नजदीक है। जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित एक पहाड़ियों के बीच एक झरना भी है जहां हर मकर सक्रांति पर एक मेले का भी आयोजन होता है जो अपने आप में एक रोचक भी है इस झरने की कुंड की जलधारा गर्म होती है इसका कारण है पहाड़ों की प्रकृति में उपस्थित औषधीय पौधों के औषधीय गुण को समैटती हुई उसकी जलधारा आती है जो अपने आप में बहुत गुणकारी और मनमोहक है इसमें हर वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर हजारों हजार की संख्या में लोग आकर स्नान करते हैं और मेले का लुफ्त उठाते हैं।
इन्हें भी देखें संपादित करें
सन्दर्भ संपादित करें
- ↑ "Bihar Tourism: Retrospect and Prospect Archived 2017-01-18 at the Wayback Machine," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999
- ↑ "Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810