बाँकीदास आसिया (1771–1833) राजस्थानी भाषा के चारण कवि एवं विद्वान थे। बांकीदास डिंगल, पिंगल, संस्कृत, फारसी आदि भाषाओं के ज्ञाता थे। आशु कवि के रूप में इनकी प्रसिद्धि पूरे राजपुताना में थी। वे इतिहास को वार्ता द्वारा व्यक्त करने में प्रवीण थे।

कविराज बाँकीदास आसिया
Kaviraja Bankidas Asiya.jpg
कविराज बाँकीदास आसिया, मारवाड़ के राजकवि
जन्म 1771
भंडियावास, बाड़मेर, राजस्थान
मृत्यु 1833
जोधपुर
राष्ट्रीयता मारवाड़ राज्य
प्रसिद्धि कारण राजस्थानी साहित्य एवं भाषा
वेबसाइट
https://www.charans.org/bankidas-asia/

बांकीदास में स्वाभिमान और निर्भीकता के गुण विद्यमान थे। उन्होंने राजकुमार छतरसिंह को शिक्षा देने में असमर्थता व्यक्त कर दी, क्योंकि वह अयोग्य था। इन्होने महाराजा मानसिंह के को नाथ सम्प्रदाय के बढ़ते हुए प्रभाव के प्रति आगाह किया, जिससे मानसिंह क्रोधित हो गया। स्वाभिमानी बांकीदास ने जोधपुर छोड़ दिया, जिसे महाराजा ने ससम्मान वापस बुलवाया।

बाँकीदास का जन्म आसिया शाखा के चारण वंश में 1781 में हुआ। रामपुर के ठाकुर अर्जुनसिंह ने बांकीदास की शिक्षा का प्रबन्ध जोधपुर में किया। यहाँ बांकीदास जोधपुर के महाराजा मानसिंह के गुरु देवनाथ के सम्पर्क में आए, जिन्होंने इनका परिचय मानसिंह से कराया। मानसिंह ने इनकी विद्वता से प्रसन्न होकर प्रथम भेट में ही इन्हें १ लाख पसाव पुरस्कार से सम्मानित किया।

19 जुलाई 1933 को जोधपुर में बांकीदास की मृत्यु हो गई।

कृतियाँसंपादित करें

सन १८३० से १८३३ के बीच इन्होने अनेक ग्रन्थों की रचना की। उनके द्वारा लिखे गये 36 काव्य ग्रंथ प्राप्त हैं जिनमें सूर छतीसी, गंगालहरी, वीर विनोद आदि प्रमुख हैं। किन्तु बांकीदास की महत्वपूर्ण कृति ख्यात है। 1956 ई में नरोत्तम दास स्वामी ने बांकीदास की ख्यात को प्रकाशित किया। ख्यात दो प्रकार से लिखी हुई प्राप्त होती हैं- संलग्न और फुटकर ख्यात।

प्रथम प्रकार की ख्यात में विषय क्रमबद्ध और निरन्तर रहता हैं, जबकि द्वितीय प्रकार की ख्यात में विषय अलग-अलग और बातों के रूप में मिलता है। बांकीदास की ख्यात में लिखी ऐतिहासिक बाते संक्षिप्त लिपि अथवा तार की संक्षिप्त भाषा के समान लिखी हुई वृहद विषय की सूचना स्रोत हैं। इनकी ख्याल में कुल बातों की संख्या 2776 हैं। इन बातों से राजस्थान के इतिहास के साथ पड़ौसी राज्यों के इतिहास सम्बन्धी तथा मराठा, सिक्ख, जोगी, मुसलमान, फिरंगी आदि की ऐतिहासिक सूचनाएं प्राप्त होती हैं.

सर्वाधिक विवरण मारवाड़ एवं देश के अन्य राठौड़ राज्यों के सम्बन्ध में हैं। मेवाड़ की राजनीतिक घटनाओं का वर्णन भी ख्यात में मिलता है। गहलोतों के साथ ही यादवों की बात, कछवाहों की बात, पड़िहारों की बात, चौहानों की बात में अलग-अलग राज्य के इतिहास वृतांतों की सूचनाएं संग्रहित हैं।

इसके अतिरिक्त विभिन्न जातियों, धार्मिक तथा फुटकर विषयक बातों के साथ साथ भौगोलिक बातों का समावेश ख्यात की मुख्य विशेषता है। वस्तुतः बांकीदास की ख्यात इतिहास का खजाना हैं।

उनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ निम्नलिखित हैं-

  • मोहा मर्दाना
  • अन्योक्ति पञ्चाशिका
  • कृपण दर्पण
  • मवादिया मिजाज
  • चुगल मिखा चपेतिका
  • विदुर बतीसी
  • दुहा अयासजी महाराज देवनाथ रा
  • झमला ठाकुरन रूपसिंह जी रा
  • सन्तोष बावनी
  • धवल पचीसी
  • नीति मञ्जरी
  • गंगालहरी

सन्दर्भसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें