बागमती (नेपाल भाषा:बागमती खुसी, नेपाली : बागमती नदी) नेपाल और भारत की एक बहुत महत्त्वपूर्ण नदी है। इस नदी के तट पर काठमांडू अवस्थित है। नेपाल का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल पशुपतिनाथ मंदिर भी इसी नदी के तट पर अवस्थित है। इस नदी का उद्गम स्थान बागद्वार है। काटमाण्डौ के टेकु दोभान मैं विष्णुमति नदी इसमें समाहित होती है। नेपाली सभ्यता में इस नदी का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस नदी के किनारे में अवस्थित आर्य घाटौं पर राजा से लेकर रंक तक सभी का अन्तिम संस्कार किया जाता है।

बागमती नदी
Bagmati River at Sundarijal (1).JPG
बागमती नदी
स्थानीय नाम बागमती
स्रोत स्थान बागद्वार
नदीमुख 31°09′16″N 74°58′31″E / 31.15444°N 74.97528°E / 31.15444; 74.97528निर्देशांक: 31°09′16″N 74°58′31″E / 31.15444°N 74.97528°E / 31.15444; 74.97528
मुख स्थान नेपाल और बिहार

उद्गम और अपवाहसंपादित करें

 
बागमती नदी के किनारे दाह संस्कार का दृश्य
 
बागमती नदी, 1950से 1955 के बीच

बागमती नदी हिमालय की महाभारत श्रेणियों में नेपाल से निकलती है। यह नदी नेपाल में लगभग 195 किलोमीटर की यात्रा तय कर के बिहार के सीतामढ़ी जिले में समस्तीपुर-नरकटियागंज रेल लाइन पर स्थित ढेंग रेलवे स्टेशन के 2.5 किलोमीटर उत्तर में भारत में प्रवेश करती है। बिहार में इस नदी की कुल लम्बाई 394 किलोमीटर है। नेपाल में इस नदी का कुल जल ग्रहण क्षेत्र 7884 वर्ग किलोमीटर है। ढेंग और बैरगनियाँ स्टेशन को जोड़ने वाली रेल लाइन पर बने पुल संख्या 89, 90, 91, 91A और 91B से होकर यह नदी दक्षिण दिशा में चलती है जहाँ लगभग 2.5 किलोमीटर नीचे भारत का जोरियाही नाम का पहला गाँव पड़ता है। यहाँ से 5 किलोमीटर दक्षिण चल कर बागमती शिवहर जिले के बखार चंडिहा और अदौरी गाँव की सीमा में आती है।ढेंग से बखार की दूरी साढे़ 11 कि॰मी॰ है और यहीं से थोड़ा और नीचे चल कर खोरीपाकड़【[पूर्वी चंपारण]] देवापुर गाँव के पास उसके दाहिने किनारे पर लालबकेया नदी इसमेेंं आकर मिलती है। इस लम्बाई में नदी की प्रवृत्ति पश्चिम से होकर बहने की है मगर लालबकेया से उसका संगम स्थल प्रायः स्थिर रहता है।लालबकैया नदी की धारा से मिलने के बाद नदी बेलवा में हर साल नदी की धारा नुकसान पहुंचाती है।धारा की लंंबाई में बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं हुए हैं यद्यपि उसकी एक पुरानी धारा का जिक्र और रेखांकन जरूर मिलता है।पुरानी धारा अभी सीतामढी जिले के मेजरगंज , रीगा , परसौनी ,बेलसंड होकर बहती है। बिहार के तराई क्षेत्रों में प्रवेश करने के बाद यह नदी बाढ़ के दिनों में अक्सर अपना प्रवाह मार्ग बदल लेती है।बैरगनियांं के आदमबांंध,मूूूषाचक ,जोरियांंही में कटाव से नुकसा होता है।सुप्पी केे रामपुर कंठ का यही हाल है। इस नदी में बाढ़ के कारण बिहार के सीतामढ़ी, मुजफ़्फ़रपुर, दरभंगा ज़िलों में काफ़ी क्षति पहुँचाती है। इसकी सहायक नदियों में लाल बकेया नदी, लखनदेई नदी या लक्ष्ष्ममणा नदी , चकनाहा नदी, जमुने नदी, सिपरीधार नदी, छोटी बागमती आदि हैं। बागमती परियोजना के अन्तर्गत बागमती नदी को भी नियन्त्रित कर इस पर पुल और नये बाँध बनाए गए हैं। यह कमला नदी से मिलकर कोसी नदी में मिल जाती है। तराई के मैदानों को पार करती हुई बागमती नदी बिहार में प्रवेश करती है और 360 किलोमीटर दूरी तय करने के बाद दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हुई बूढ़ी गंडक नदी में मिल जाती है।[1]

जल ग्रहण क्षेत्रसंपादित करें

बिहार में इस नदी की कुल लम्बाई 394 किलोमीटर तथा जल ग्रहण क्षेत्र लगभग 6,500 वर्ग किलोमीटर होता है। इस तरह नदी उद्गम से गंगा तक कुल लम्बाई लगभग 589 किलोमीटर और कुल जल ग्रहण क्षेत्र 14,384 वर्ग किलोमीटर बैठता है। बिहार के द्वितीय सिंचाई आयोग की रिपोर्ट (1994) के अनुसार बागमती के ऊपरी क्षेत्र काठमाण्डू के आस-पास सालाना औसत बारिश लगभग 1460 मिलीमीटर होती है जबकि चम्पारण में 1392 मि.मी., सीतामढ़ी में 1184 मि.मी., मुजफ्फरपुर में 1184 मि.मी., दरभंगा में 1250 मि.मी. और समस्तीपुर में 1169 मि.मी. होती है।[2]हालाांकि पूूू्र्व चंंपारण जिले से अब नाम मात्र का संंपर््क है।

सहायक नदियांसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. भारत ज्ञान कोश, खंड-4, प्रकाशक-पोप्युलर प्रकाशन मुंबई
  2. "इंडिया वाटर पोर्टल हिन्दी: बिहार में बागमती नदी". मूल से 10 जून 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2013.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें