बादल संघनन नाभिक या संघनन का नाभिक (अंग्रेजी: Cloud condensation nuclei) [या मेघांकुर(मेघ के अंकुर)] वो छोटे कण (आमतौर पर 0.2 μm या बादल की बूदों के आकार का 1/100 वां भाग) होते हैं जिन पर, बादल की छोटी बूंदें आपस में जुड़कर एक बड़ी बूंद का निर्माण करती हैं। जल को वाष्प से द्रव अवस्था प्राप्त करने के लिए एक गैर-गैस सतह की आवश्यकता होती है और वातावरण में, यह सतह बादल संघनन नाभिक उपलब्ध कराते हैं। जब कोई बादल संघनन नाभिक मौजूद नहीं होता तो भी, जल वाष्प को 0° सेल्सियस (32 °F) से नीचे परमशीतल किया जा सकता है ताकि बूंदों का स्वत: निर्माण हो सके (यह उपपरमाण्विक कणों का पता लगाने के लिए प्रयुक्त बादल कक्ष तकनीक का आधार है)। हिमांक से ऊपर के तापमान में बूंदों के निर्माण के लिए वायु की परमसंतृप्ता 400% के आसपास होनी चाहिए। बादल संघनन नाभिक ही मेघांकुर की अवधारणा का आधार है, जिसके अंतर्गत वर्षा करवाने के लिए वायु में मेघांकुर छोड़े जाते हैं।

उत्तरी भारत और बांग्लादेश के ऊपर एअरोसोल प्रदूषण- नासा

आकार, प्रचुरता और रचनासंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

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