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डॉ बालकृष्ण शिवराम मुंजे (१२ दिसम्बर १८७२ - ३ मार्च १९४८) भारत के एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा हिन्दू महासभा के सदस्य थे। वे सन १९२७-२८ में अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बनवाने में इनका बहुत योगदान था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के वे राजनितिक गुरु थे। डॉ॰ मुंजे भारत में सैनिक-शिक्षा के पुरोधा थे।

जीवन परिचयसंपादित करें

डॉ मुंजे का जन्म 1872 में मध्य प्रान्त (सेन्ट्रल प्रोविन्स ; वर्तमान में छत्तीसगढ़) के बिलासपुर में हुआ था। उन्होंने 1898 में मुम्बई में ग्रांट मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली। फिर मुम्बई नगर निगम में चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम करने लगे। सैन्य जीवन में उनकी गहरी रुचि के चलते वो सेना में कमीशन अधिकारी बन गए। सेना की चिकित्सा शाखा उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बोअर युद्ध में भाग लिया।

गांधीजी की मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति से असहमत होने के कारण डॉ॰ मुंजे कांग्रेस से अलग हो गए और उनकी गिनती हिन्दू महासभा के तेजस्वी नेताओं में होने लगी। 1930 और 1931 के गोलमेज सम्मेलनों में वे हिन्दू महासभा के प्रतिनिधि के रूप में गए थे जबकि गांधीजी केवल 1931 के सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में गए। गोलमेज सम्मेलन के बाद फरवरी से मार्च 1931 तक यूरोप का भ्रमण किया। 15 मार्च से 24 मार्च तक वे इटली में भी रुके। वहाँ वे मुसोलिनी से भी मिले।

1934 में मुंजे ने सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की जिसका उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा के लिए युवा हिंदुओं को सैन्य प्रशिक्षण देना और उन्हें 'सनातन धर्म' की शिक्षा देना था। साथ ही, निजी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की कला में युवाओं को प्रशिक्षित करना था।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें