बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन एक हिन्दी सेवी संस्था है। मुजफ्फरपुर के हिन्दू भवन के हाते में 19 अक्टूबर 1919 को, श्रीयुत जगन्नाथ प्रसाद एम॰ ए॰ बी॰ एल॰ काव्यतीर्थ के सभापतित्व में, हिन्दी सेवियों और हिन्दी प्रेमियों की एक सार्वजनिक सभा हुई, जिसमें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना का निर्णय किया गया।

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन


1910 में हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना हुई थी। 1920 में सम्मेलन का 10वां अधिवेशन बिहार में सुनिश्चित हुआ और इसी के साथ बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की सुगबुगाहट भी शुरू हो गई। आखिरकार डॉ राजेंद्र प्रसाद के विशेष पहल व लक्ष्मी नारायण सिंह, मथुरा प्रसाद दीक्षित, बाबू वैद्यनाथ प्रसाद सिंह, पीर मोहम्मद यूनिस, लतीफ हुसैन नटवर और पंडित दर्शन केशरी पांडेय जी के प्रयास से मुजफ्फरपुर के हिन्दू भवन में 19 अक्टूबर 1919 को जगन्नाथ प्रसाद के सभापतित्व में सार्वजनिक सभा हुई जिसमें बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना का निर्णय हुआ।

1919 में साहित्य सम्मेलन की स्थापना के बाद 1920 में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 10वां सम्मेलन पटना में आयोजित करने की घोषणा हुई थी। जिसको लेकर ही पटना में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना की गई। शुरू में ज़मीन उपलब्ध न होने के चलते किराए की भूमि पर इसके कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता था। पहले इसका मुख्यालय मुजफ्फरपुर में हुआ करता था फिर 1935 में इस मुख्यालय को पटना में लाया गया और 1937 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के लिए कदमकुआं में अपनी ज़मीन मिली। साहित्य सम्मेलन प्रारंभ से ही हिन्दी साहित्य जगत की बड़ी विभूतियों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सारे बड़े नेताओं का केन्द्र हुआ करता था। डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद समेत कई बड़ी विभूतियां साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पद को सुशोभित करते रहे।[1]

  1. "झारखंड के 14 साहित्यकारों को सम्मानित करेगा बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन". प्रभात खबर. अभिगमन तिथि २१ मई २०२४.

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