बीबीसी हिन्दी एक अन्तरराष्ट्रीय समाचार सेवा है। इसका आरम्भ ११ मई १९४० को हुआ। प्रारम्भ में यह सेवा रेडियो के माध्यम से संचालित होती थी। वर्तमान में ये सेवा ऑडियो के साथ-साथ वेबसाइट, टीवी एवं सामाजिक जालस्थलों पर भी संचालित हो रही है।[1]

परिचयसंपादित करें

बीबीसी हिंदी सेवा पिछले लगभग 80 सालों से आप तक समाचार पहुँचा रही है। एक स्वतंत्र सर्वेक्षण के अनुसार, इस समय भारत में करीब दो करोड़ लोग बीबीसी हिन्दी की ख़बरों से जुड़े हैं। इसके अलावा दक्षिण एशिया और खाड़ी के देशों में भी बीबीसी के श्रोताओं की बड़ी संख्या है।

बीबीसी हिंदी की वेबसाइट 24x7 वेबसाइट है। इसके अलावा बीबीसी हिंदी का टीवी कार्यक्रम बीबीसी दुनिया एनडीटीवी इंडिया पर रात दस बजे आता है। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के अपडेट्स होते हैं और कम ही समय में इस कार्यक्रम ने काफ़ी लोकप्रियता हासिल कर ली है।

बीबीसी हिंदी का यूट्यूब चैनल [2] बीबीसी की सभी भाषाओं में सबसे बड़ा यूट्यूब चैनल है। वहाँ 80 लाख से ज़्यादा लोग चैनल के सब्सक्राइबर हैं। इसी तरह फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर भी बीबीसी की सेवाएँ काफ़ी लोकप्रिय हैं।

बीबीसी हिंदी ने डिजिटल टीवी की ओर भी अहम क़दम उठाया है और जियो टीवी पर न्यूज़ के सेक्शन में बीबीसी हिंदी का 24x7 स्ट्रीम उपलब्ध है।

बीबीसी हिंदी का रेडियो प्रसारण 31 जनवरी 2020 को समाप्त हो गया मगर उसके बाद से ऑडियो के कार्यक्रम बीबीसी हिंदी के सोशल मीडिया चैनल्स के साथ ही गाना और सावन जैसे ऑडियो प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। अब भी लोग दुनिया जहाँ और विवेचना जैसे कार्यक्रम इन प्लेटफ़ॉर्म्स पर बड़ी तादाद में सुन रहे हैं।

अतीतसंपादित करें

बीबीसी लंदन से हिन्दी में प्रसारण पहली बार 11 मई 1940 को हुआ था। इसी दिन विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे। बीबीसी हिन्दुस्तानी सर्विस के नाम से शुरु किए गए प्रसारण का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के ब्रितानी सैनिकों तक समाचार पहुंचाना था। भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद हिन्दुस्तानी सर्विस का भी विभाजन हो गया, और 1949 में जनवरी महीने में इंडियन सेक्शन की शुरुआत हुई।

इस सेवा की शुरुआत भारत के जाने-माने प्रसारक ज़ुल्फ़िकार बुख़ारी ने की थी, बाद में बलराज साहनी और जॉर्ज ऑरवेल जैसे शानदार प्रसारक हिन्दुस्तानी सेवा से जुड़े. पुरुषोत्तम लाल पाहवा, आले हसन, हरीशचंद्र खन्ना और रत्नाकर भारतीय जैसे शीर्ष प्रसारकों ने मोर्चा संभाला और हिन्दी सेवा ने झंडे गाड़ दिए। 1950 के दशक में बीबीसी हिन्दी सेवा में इंदर कुमार गुजराल ने भी पत्रकारिता और प्रसारण कौशल के क्षेत्र में अपने हाथ आज़माए। 47 साल बाद वे भारत के प्रधानमंत्री बने।

1960 के दशक में आए महेंद्र कौल, हिमांशु कुमार भादुड़ी और ओंकारनाथ श्रीवास्तव, कैलाश बुधवार और भगवान प्रकाश 1970 के दशक में बीबीसी हिन्दी सेवा से जुड़े. 1980-1990 के दशकों में भी कई पत्रकार और प्रसारक आए और यह सिलसिला अब भी जारी है।

बीबीसी टीमसंपादित करें

बीबीसी हिन्दी की टीम चौबीस घंटे काम करती है। लंदन ही नहीं, भारत के लगभग हर राज्य की राजधानी में इनके पत्रकार लोगों तक समाचार पहुंचाने के लिए तैनात हैं। पिछले दो दशकों में बीबीसी के मधुकर उपाध्याय, मणिकांत ठाकुर, रामदत्त त्रिपाठी, नारायण बारेठ, राजेश जोशी,रुपा झा, मुकेश शर्मा, राजेश प्रियदर्शी ने अपनी खास पहचान बनाई है।

1994 में दिल्ली में हिन्दी सेवा ने ब्यूरो बनाया। बीबीसी हिन्दी सेवा अपनी स्वतंत्र विचारधारा के लिए हमेशा से जानी जाती रही है। राजनीति से लेकर खेल के मैदान तक हर विषय पर इनके कार्यक्रम हिन्दी पत्रकारिता को दिशा देते रहे हैं।

मुकेश शर्मा इस समय बीबीसी हिंदी के एडिटर हैं।

प्रसारण समयसंपादित करें

बीबीसी की दो पारियों में दो सभा सुबह नमस्कार भारत और शाम को दिन भर प्रसारित होता था। बाद में इस सेवा में कटौती कर दी गई और सुबह और शाम को केवल एक-एक सभायें प्रसारित होने लगीं। इसके बाद 2019 में सुबह की सभा बंद कर दी गई और शाम की सभा दिन भर को 31 जनवरी 2020 से बंद करने की घोषणा कर दी गई। अब शार्ट वेब पर बीबीसी हिंदी रेडियो की सेवा नहीं सुनी जा सकती।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?". मूल से 5 जनवरी 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 जनवरी 2018.
  2. "बीबीसी हिंदी का यूट्यूब चैनल".

कड़ियांसंपादित करें