बेमेतरा
Bemetara
बेमेतरा की छत्तीसगढ़ के मानचित्र पर अवस्थिति
बेमेतरा
बेमेतरा
छत्तीसगढ़ में स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: बेमेतरा ज़िला
छत्तीसगढ़
Flag of India.svg भारत
जनसंख्या (2011): 28,536
मुख्य भाषा(एँ): हिन्दी, छत्तीसगढ़ी
निर्देशांक: 21°42′N 81°32′E / 21.70°N 81.53°E / 21.70; 81.53

बेमेतरा (Bemetara) छत्तीसगढ़ का एक शहर हैं, जो दुर्ग जिले से अलग होकर नए जिले के रूप में १४ जनवरी २०१२ को अस्तित्व में आया।

यह जिला मूल रूप से अपने उन्हारी उत्पादन के लिए पुरे एशिया में विख्यात हैं। यहाँ चना का अत्यधिक उत्पादन होता है। बेमेतरा जिला कृषि से समृद जिला है। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी यह जिला अग्रिणी रहा हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजित श्री गोकूल प्रसाद बंजारे जी भी इसी जिले के निवासी है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने बेमेतरा के पीजी कॉलेज से शिक्षा प्राप्त किया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कवि सुरेन्द्र दुबे भी इसी माटी के हैं, इन्टरनेट पर न्यूज़ सर्विस दे रहे अजीत कुमार शर्मा बेमेतरा जिले के पहले अधिमान्य प्राप्त पत्रकार हैं। माता भद्रकाली संस्थान, योगिद्वीप. देवरबीजा, सरदा, देवकर. नवागढ़ सहित कई महत्वपूर्ण जगह इस किले में स्थित हैं।बेमेतरा से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम संडी है जहाँ पर माँ सिद्धि विराज मान है जिसके दर्शन मात्र से मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।

जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूरी पर बेरला ब्लॉक में पवित्र धाम चेटवापुरी स्थित है , जहां संत गुरु घासीदास के प्रथम पुत्र "गुरु अमरदास साहेब " का समाधि स्थल है । रेलमार्ग से अछूता यह शहर सिर्फ सड़क मार्ग के भरोसे भी सफलता की और अग्रसर हैं। यही बेमेतरा की रहने वाली श्रीमती रिंकी पांडेय ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया है , आपने सरकारी विद्यालय में पढाने के साथ साथ निःशुल्क गरीब बच्चो को अपने घर पर पढ़ाती है, जिसमे सभी वर्गों के गरीब बच्चे पढ़ते हैं।

बेमेतरा जिले में कुल एक हजार 385 शैक्षणिक संस्थाएं संचालित हो रही है। इनमें पांच कॉलेज, 63 हायर सेकेण्डरी स्कूल, 59 हाई स्कूल, 411 मिडिल स्कूल, 845 प्राथमिक शालाएं और दो तकनीकी शिक्षण संस्थाएं शामिल हैं।

जनसंख्यासंपादित करें

बेमेतरा नगर नवीन बेमेतरा जिले का एकमात्र नगर पालिका है।। जो 21 वार्डों में बटा हुआ है। बेमेतरा नगर पालिका के वर्तमान अध्यक्ष श्री विजय सिन्हा जी हैं। बेमेतरा नगर की जनसंख्या 2011 की जनगणना के हिसाब से 28536 है। बेमेतरा नगर में स्थित सिद्ध शक्तिपीठ माता भद्रकाली व माता शीतला के प्रसिद्ध मंदिर हैं।

स्थितिसंपादित करें

छत्तीसगढ राज्य दुर्ग जिले को विभजित कर 21 वें जिले के रूप में बालोद एवं 22वें जिले के रूप में 13 जनवरी 2012 को बेमेतरा जिला का गठन किया गया। जिसका विधिवत उदृघाटन राज्य के मुख्यमंत्री माननीय रमन सिंह जी के द्वारा किया गया।

विस्तारसंपादित करें

लगभग दो हजार 855 वर्ग किलोमीटर में फैले इस नये जिले में पांच तहसीलों के अंतर्गत 697 गांव, 334 ग्राम पंचायत और सात नगरीय क्षेत्र शामिल हैं। बेमेतरा जिला शिवनाथ, सुरही, हाफ और संकरी नदी के आंचल में 697 गांवों और 334 ग्राम पंचायतों के साथ दो हजार 855 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। नये जिले में पांच तहसीलें (विकासखण्ड) - नवागढ़, बेमेतरा, बेरला, साजा और थानखम्हरिया और सात नगरीय निकाय- नगर पालिका परिषद बेमेतरा सहित नगर पंचायत साजा, थानखम्हरिया, मारो, देवकर, परपोड़ी और बेरला शामिल हैं। जिले के सभी 697 आबाद गांवों का विद्युतीकरण हो चुका है। बेमेतरा जिले में किसान लगभग दो लाख 35 हजार हेक्टेयर में खेती करते हैं। मुख्य रूप से बेमेतरा जिले में धान के साथ-साथ दलहन-तिलहन, गन्ना और गेहूं की खेती हो रही है। नये बेमेतरा जिले की कुल जनसंख्या सात लाख 95 हजार 334 है। इसमें सात लाख 21 हजार की आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।

मन्दिरसंपादित करें

जिला मुख्यालय बेमेतरा से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर हाफ नदी के किनारे ग्राम बुचीपुर में चौदहवीं शताब्दी का प्रसिध्द महामाया मंदिर इस नये जिले के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। बुचीपुर से 10 किलोमीटर की दूरी में स्थित है योगीदीप जहां हर साल होली के बाद मेला का अयोजन होता है। बेमेतरा से 15 किलोमीटर की दुरी पर दुर्ग जाने वाले मार्ग मे देवरबीजा ग्राम में स्थित सीता मंदिर और रायपुर जीले की सरहद में शिवनाथ और खारून नदी के संगम में अत्यंत रमणीय व धार्मिक पर्यटक स्थल सोमनाथ का मंदिर इस जिले की शोभा बढ़ाते हैं।

सवा लाख शिवलिंग मंदिरसंपादित करें

मां भद्रकाली की गोद में बसा हुआ है बेमेतरा जिला, जिले में प्रचीन इतिहास से जुड़े कई मंदिर स्थित है. देश का एक मात्र प्रसिद्ध शमी गणेश मन्दिर बेमेतरा से 24 किलोमीटर नवागढ़ में मौजूद है. जिले को गौरवान्वित करती प्रदेश की एक मात्र सीता मंदिर दुर्ग जाने वाले मार्ग पर बेमेतरा से 15 किलोमीटर की दूरी देवरबीजा गांव में स्थित है. इन मंदिरों का इतिहास प्रचीन है. इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था. इन गौरव शाली इतिहास के आलवा जिले में बेमेतरा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर बुचीपुर में स्थित 14वीं शताब्दी की प्रसिद्ध मां महामाया, बेमेतरा शहर में स्थित माता भद्रकाली व माता शीतला मंदिर, हाफ नदी के समीप बेमेतरा से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित योगीदीप, संडी की सिद्दी माता के साथ-साथ जिले में अन्य प्रसिद्द मंदिर कई रहस्यों के साथ स्थित है.

लेकिन अब बेमेतरा में एक ऐसा मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में बेमेतरा को देश-दुनिया में अलग ही पहचान दिलाने वाला है. बेमेतरा से 17 किलोमीटर की दूरी में स्थित सल्धा गांव में एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण किया जा रहा हैं. जहां सवा लाख शिवलिंग स्थापित किया जाएगा. ये मंदिर 'एशिया की सबसे बड़ी शिव मंदिर' होगी. इस मंदिर का निर्माण 5 एकड़ भूमि में किया जा रहा है. मंदिर का निर्माण जगतगुरु शंकराचार्य स्वरुपानंद महाराज व दांडी स्वामी आदि मुक्क्तेश्वर महाराज के सनिध्य में किया जा रहा हैं. ये मंदिर 9 मंजिल का होगा. जिसका आकार श्रीयंत्र के रुप में दिया जा रहा है. इसकी ऊंचाई 95 फीट होगी. बताया जा रहा कि मंदिर निर्माण की लागत करीब 64 करोड़ रुपये की है. मंदिर निर्माण के लिए कई दानदाता समिति से जुड़ते जा रहे है. अब तक लगभग 25 हजार से अधिक लोग समिति से जुड़कर दान कर चुके हैं. समिति का कहना है कि, लोग यहां अपने पूर्वजों की याद में शिवलिंग की स्थापना करा सकते हैं.

"सवा लाख शिवलिंग के एक साथ होंगे दर्शन"

95 फीट ऊंचे मंदिर में एक साथ सवा लाख शिवंलिग के दर्शन करने का सौभाग्य मिलेगा. 34 हजार वर्ग फीट में फैले इस मंदिर में सवा लाख शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्तों को तकरीबन सवा किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ेगी. बताया जा रहा है कि, मंदिर का निर्माण 2021 तक कर लिया जाएगा.