बैंकिंग कॉरस्पॉण्डेण्ट योजना भारत में वित्तीय समावेशन हेतु चलाई जा रही भारतीय रिज़र्व बैंक की एक महत्वाकाँक्षी योजना है। इस योजना की शुरुआत जनवरी 2006 में हुई।इनको शासकीय किया जाना चाहिए

पृष्ठभूमिसंपादित करें

गाँव-गाँव में बैंकों की शाखाएँ खोलना बैंकों के लिए फायदे का सौदा नहीं है क्योंकि कम जनसंखया के कारण लाभ कम होता है लेकिन लागत पूरी आती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जनवरी 2006 में भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंको को दूर दराज के क्षेत्रों तक बैंकिंग व वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने के लिए बिचौलिए के रूप में सेवाप्रदाताओं का उपयोग करने की अनुमति दी जिन्हें "बिज़नेस फैसिलिटेटर" (Business Facilitators, BFs) अथवा "बैंकिंग (या बिज़नेस) कॉरस्पॉण्डेण्ट" (Banking (or Business) Correspondents, BCs) नाम दिया गया।[1]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 23 फ़रवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 मई 2014.