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भारत की एक बैलगाड़ी

बैलगाड़ी बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी या यान है। यह विश्व का सबसे पुराना यातायात का साधन एवं सामान ढ़ोने का साधन है। यह यातायात का एक साधन भी होता था है और मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में प्रयोग में लाया जाता है। इसे बैलों द्वारा खींचा जाता हैं। इसकी डिजाइन बहुत सरल होती है और परम्परागत रूप से इसे स्थानीय संसाधनों से स्थानीय कारीगर बनाते रहें हैं। आज भी विश्व के सभी भागों में बैलगाड़ियाँ पायी जातीं हैं।

लेकिन इस समय इसका चलन कम होता जाता है क्योंकि आज के जमाने में बहुत सारे गाड़ी आ चुके है (जैसे-ट्रैक्टर) ये वाहन से लोग अपना काम आसान कर लिए है। और ट्रेक्टर से सामान एक जगह से दूसरे ले जाने में आसानी होती है। जिसके वजह से लोग आजकल बैलगाड़ी का उपयोग करना लगभग बंद कर दिए है।

बैलगाड़ी-साइकिल के सहारे शुरू हुआ आसमान मुट्ठी में करने का सफर

डॉ. विक्रम साराभाई ने 15 अगस्त 1969 को इसरो की स्थापना की थी. आपको जानकर हैरत होगी की हमारे वैज्ञानिक आसमान मुट्ठी करने के सफर पर साइकिल और बैलगाड़ी के जरिए निकले थे। वैज्ञानिकों ने पहले रॉकेट को साइकिल पर लादकर प्रक्षेपण स्थल पर ले गए थे. इस मिशन का दूसरा रॉकेट काफी बड़ा और भारी था, जिसे बैलगाड़ी के सहारे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया था.