बोड़ोलैंड

ऑल बोडो स्टुडंट्स यूनियन / एबीएसयू टी द्वारा एक प्रस्तावित राज्य की मांग की जा रही है
(बोडोलैंड से अनुप्रेषित)

बोड़ोलैण्ड टेरिटोरियल काउन्सिल (संक्षेप में, बोड़ोलैण्ड, बोड़ो भाषा : बरलैन्ड) भारत के असम राज्य का एक स्वायत्त क्षेत्र है। इसके अन्तर्गत असम के चार जिले आते हैं जो ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे के जिले हैं। इस क्षेत्र में बर जनजाति (जिसे अंग्रेजी में बोडो कहते हैं।) का बाहुल्य है। यह फरवरी २००३ में एक स्वायत्ता क्षेत्र घोषित किया गया था।

बोडो समझौतासंपादित करें

२७ जनवरी २०२० को केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में ५० वर्षों से चले आ रहे बोडो मुद्दे के समाधान के लिये समझौता किया गया। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल, नेडा के अध्यक्ष श्री हिमंता विश्व शर्मा, बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य हग्रामा मोहिलारी एअं अन्य लोग सम्मिलित थे।

इस समझौते के बाद १५०० से अधिक हथियारधारी सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएँगे। समझौते में भारत सरकार और राज्य सरकार विशेष विकास पैकेज द्वारा १५०० करोड़ रुपए के खर्च से असम में बोडो क्षेत्रों के विकास के लिए विशिष्ट परियोजनाएं शुरू करना शामिल है। इसके अलावा बोडो आन्दोलन में मारे गए लोगों के प्रत्येक परिवार को ५ लाख का मुआवजा दिया जाएगा।

पूर्व में वर्ष 1993 और 2003 के समझौतों से संतुष्ट न होने के कारण बोडो द्वारा और अधिक शक्तियों की मांग लगातार की जाती रही और असम राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखते हुए बोडो संगठनों के साथ उनकी मांगों के लिए एक व्यापक और अंतिम समाधान के लिए बातचीत की गई। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद अगस्त 2019 से एबीएसयू, एनडीएफबी गुटों और अन्य बोडो संगठनों के साथ दशकों पुराने बोडो आंदोलन को समाप्त करने के लिए व्यापक समाधान तक पहुंचने के लिए गहन विचार-विमर्श भी किया गया।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य बीटीसी के क्षेत्र और शक्तियों को बढ़ाने और इसके कामकाज को कारगर बनाना है। इसके साथ बीटीएडी के बाहर रहने वाले बोडो से संबंधित मुद्दों का समाधान तथा बोडो की सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई और जातीय पहचान को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना भी है। समझौते के अन्य बिंदुओं में आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिए विधायी सुरक्षा प्रदान करना और जनजातीय क्षेत्रों का त्वरित विकास सुनिश्चित करने के साथ साथ एनडीएफबी गुटों के सदस्यों का पुनर्वास करना भी शामिल है।

असम सरकार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीटीएडी के बाहर बोडो गांवों के विकास के लिए बोडो-कचारी कल्याण परिषद की स्थापना करेगी। असम सरकार बोडो भाषा को राज्य में सहयोगी आधिकारिक भाषा के रूप में अधिसूचित करेगी और बोडो माध्यम स्कूलों के लिए एक अलग निदेशालय की स्थापना करेगी।

वर्तमान समझौते के तहत NDFB गुट हिंसा का रास्ता छोड़ने के साथ साथ आत्मसमर्पण करेंगे और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक महीने के भीतर अपने सशस्त्र संगठनों को खत्म कर देंगे। भारत और असम सरकार इस संबंध में निर्धारित नीति के अनुसार एनडीएफबी (पी), एनडीएफबी (आरडी) और एनडीएफबी (एस) के लगभग 1500 से अधिक कैडरों के पुनर्वास के लिए आवश्यक उपाय भी करेगी।

सन्दर्भसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

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