बोस-आइंस्टाइन संघनन

बोस-आइंस्टाइन द्राव या बोस-आइंस्टाइन संघनित (Bose–Einstein condensate (BEC)) पदार्थ की एक अवस्था जिसमें बोसॉन की तनु गैस को परम शून्य (0 K या −273.15 °C) के बहुत निकट के ताप तक ठण्डा कर दिया जाता है। इस स्थिति में अधिसंख्य बोसॉन निम्नतम क्वाण्टम अवस्था में होते हैं और क्वाण्टम प्रभाव स्थूल पैमाने पर भी दिखने लगते हैं। इन प्रभावों को 'स्थूल क्वाण्टम परिघटना' (macroscopic quantum phenomena) कहते हैं।

क्वाण्टम फेज ट्रांजीशन

पदार्थ की इस अवस्था की सबसे पहले भविष्यवाणी 1924-25 में सत्येन्द्रनाथ बोस ने की थी। किन्तु बाद में किये गये प्रयोगों से जटिल अन्तरक्रिया का पता चला।

बॉस-आइंस्टीन कंडेंसेट की उपयोगिता

स्पेक्ट्रल 2016 फिल्म - अमेरिकी सैन्य युद्ध रहस्यमय दुश्मन जीव बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट से बने स्पेक्ट्रल का विज्ञान: क्या वास्तव में बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट कैसे व्यवहार करता है? एक वास्तविक बोस-आइंस्टीन घनीभूत वैज्ञानिक स्पेक्ट्रल के विज्ञान की समीक्षा करते हैं। साथ ही फिल्म के निर्देशक निक मैथ्यू की प्रतिक्रिया। थिलो स्टॉफ़र्ले। 18 जुलाई, 2017. एआरएस टेक्निका । 4 जून, 2021 को एक्सेस किया गया। ब्लाइंड लेक 2003 उपन्यास - वैज्ञानिक बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट-आधारित क्वांटम कंप्यूटरों द्वारा संचालित दूरबीनों का उपयोग करके 51 प्रकाश-वर्ष दूर एक ग्रह पर संवेदनशील जीवन का निरीक्षण करते हैं। मास इफेक्ट में क्रायोनिक गोला बारूद है जिसका स्वाद पाठ बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट्स से भरे जाने के रूप में वर्णित है। प्रभाव पड़ने पर, गोलियां फट जाती हैं और दुश्मन पर सुपरकोल्ड लिक्विड का छिड़काव करती हैं।