धर्मग्रन्थों (विशेषतः वेदमंत्रों और उपनिषद) के अध्ययन से प्राप्त ज्ञान ब्रह्मविद्या कहा जाता है। हिन्दू धर्म में ब्रह्मविद्या को ही सर्वश्रेष्ठ आदर्श माना गया है।

पुराणों में ब्रह्मविद्या के दो भेद बताये गये हैं- परा विद्या तथा अपरा विद्या। परा विद्या, वेदमंत्रों से सम्बन्धित है जबकि अपरा विद्या उपनिषदों के अध्ययन से सम्बन्धित है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें