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भट्टि संस्कृत के प्रसिद्द कवि थे। वे संस्कृत साहित्य के प्रमुख महाकाव्यकारों में से एक हैं जिनकी प्रसिद्द रचना रावणवधम् है जो वर्तमान में भट्टिकाव्य के नाम से अधिक जानी जाती है।

भट्टि का काल कम से कम ६४१ ई॰ से पूर्व है क्योंकि उनकी रचना में आये वर्णन के अनुसार उन्होंने श्रीधरसेन द्वारा शासित वलभी में रहकर इसकी रचना की थी और इस नाम के आखिरी शासक का प्रमाण ६२१ ई॰पू॰ ही मान्य है।[1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. कीथ, एलन बी॰ (1967). "भारवि, भट्टि, कुमारदास और माघ". संस्कृत साहित्य का इतिहास. नई दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास. पपृ॰ 142–146. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-208-2643-4.

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