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भारत का स्थलाकृति मानचित्र (topography map)

भारत एक विशाल देश है जिसमें अनेक धरातलीय विविधताएँ, विषमताएँ और जटिलताएँ पाई जाती हैं। यहाँ ऊँचे-ऊँचे पर्वत, पठार तथा समतल मैदानी सभी प्रकार की स्थलाकृतियाँ पाई जाती है। इनकी विद्यमानता के परिणाम स्वरूप भारत का भू-आकृति प्रादेशीकरण (Physiographic Regionalisation) अत्यन्त कठिन कार्य है। इस कार्य के लिए लम्बे समय से अनेक विद्वान प्रयत्नशील रहे हैं, परन्तु वे त्रुटिमुक्त प्रादेशीकरण प्रस्तुत करने में सफल नहीं हो सके। इस क्षेत्र में आर0 एल0 सिंह और बी0 के0 राय के प्रयास काफी सराहनीय एवं अग्रणी माने जाते हैं। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नांकित है :

आर॰ एल॰ सिंह द्वारा प्रस्तावित भारत का भू-आकृतिक प्रादेशीकरणसंपादित करें

भूगर्भिक संरचना, भौतिक आकृति तथा स्थिति को आधार मान कर प्रोफेसर आर॰ एल॰ सिंह ने अपनी पुस्तक 'इण्डिया - अ रेजनल जिओग्रैफी' में भारत को चार बड़े भू-आकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया है। जो निम्नलिखित हैं-

  • (१) उत्तरी पर्वत (The Northern Mountains)
  • (२) विशाल मैदान (The Great Plains)
  • (३) प्रायद्वीपीय उच्च भूमि (The Peninsular Uplands)
  • (४) भारतीय तट तथा द्वीप (The Indian Coasts and Islands)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें