भारत में मौत की सज़ा कुछ गंभीर अपराधों के लिए दी जाती है।[1] भारत के उच्चतम न्यायालय ने १९९५ के बाद ५ घटनाओं में मौत की सज़ा दी है[2][3][4][5] जबकि १९९१ से अब तक इसकी कुल संख्या २६ है।[6]

मिथु बनाम पंजाब राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा ३०३ के तहत आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे किसी व्यक्ति को आवश्यक रूप से मौत की सज़ा देने को गैरकानूनी माना है।[7] भारत में १९४७ में स्वतंत्रता के बाद मौत की सजा प्राप्त लोगों की संख्या विवादित है; अधिकारिक सरकारी आँकड़ों के अनुसार स्वतंत्रता के बाद अब तक केवल ५२ लोगों को फाँसी की सजा दी गयी है। यद्यपि पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के एक शोध के अनुसार यह संख्या बहुत अधिक है और इसके अनुसार केवल १९५३ से १९६३ के दशक में ही यह संख्या १,४२२ है।[8] नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के एक शोध के अनुसार भारत में वर्ष २००० से अब तक नीचली अदालतों द्वारा कुल १,६१७ कैदियों को मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है, जिनमें से केवल ७१ मामलों में मृत्यु दण्ड की पुष्टि केवल ७१ मामलों में हुई।[9][10] नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के अनुसार १९४७ से अब तक भारत में कुल ७५५ लोगों को मृत्यु दण्ड दिया जा चुका है।[11] नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली की जाँच में पाया गया कि १९४७ से स्वतंत्रता के बाद के बाद उपलब्ध अपराधियों की सूची में १,४१४ कैदियों को फाँसी पर लटकाना पाया गया।[12] भारतीय विधि आयोग (१९६७) की एक रपट के अनुसार १९५३ से १९६३ तक मृत्यु दण्ड को प्राप्त लोगों की संख्या १,४१० है।[13]

दिसम्बर २००७ में, भारत ने मौत की सजा पर रोक के संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प के विरुद्ध मतदान किया था।[14] नवम्बर २०१२ में, मौत की सजा को प्रतिबन्धित करने के लिए रखे गये संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदे के विरुद्ध मतदान करते हुये अपने फैसले को बरकरार रखा।[15]

३१ अगस्त २०१५ को, भारत के विधि आयोग ने सरकार को एक प्रतिवेदन सौंपा जिसमें देश्द्रोह अथवा आतंकी अपराधों के अतिरिक्त अन्य अपराधों के लिए मौत की सजा को समाप्त करने की संस्तुति की। इस प्रतिवेदन में मौत की सजा को समाप्त करने के लिए विभिन्न कारकों को उद्धृत किया गया है जिसमें १४० अन्य देशों में इसकी समाप्त का भी उल्लेख है। यह एक त्रुटिपूर्ण तथा एकपक्षीय सोच वाला प्रतिवेदन था तथा इसमें अपराधियों में भय पैदा करने वाले किसी भी प्रभाव का उल्लेख नहीं था।[16]

इतिहाससंपादित करें

औपनिवेशिक भारत में, भारतीय दण्ड संहिता, १८६० के अनुसार मौत की सजा को निर्धारित किया गया था,[7] जो विभिन्न संगीन अपराधों के लिए निर्धारित थी। यह १९४७ में देश की स्वतंत्रता के बाद भी जारी रही। स्वतंत्र भारत में पहली मौत की सजा १५ नवम्बर १९४९ को महात्मा गांधी की हत्या मामले में नाथुराम गोडसे और नारायण आप्टे को दी गयी।[17]

भारतीय संविधान के अनुच्छेद २१ के अनुसार विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता।

बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (१९८०)संपादित करें

बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (१९८०) में भारत के उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले के अनुसार भारत में विरल से विरले मामलों में ही मौत की सजा दी जा सकती है।[3][18] यह निर्णय जगमोहन सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (१९७३) और उसके बाद राजेन्द्र प्रसाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (१९७९) पूर्व निर्णयों के उल्लेख के साथ हुआ।[19][20][21] भारत के उच्चतम न्यायालय ने रेखांकित किया कि मौत की सजा "विरले से विरले मामलों" में ही देनी चाहिए।[1] जबकि इसके साथ यह भी कहा कि सम्मान के लिए हत्या "विरले से विरले" श्रेणी में ही आती है, न्यायालय ने इसकी संस्तुति की कि "सम्मान के लिए हत्या" के मामलों में मौत की सजा बढ़ाया जा सकता है।[22] उच्चतम न्यायालय ने उन पुलिस अधिकारियों के लिए भी मौत की सजा सुनाई जो फ़र्जी मुठभेड़ के मामलों में बर्बरता फैलाते हैं।[23]

विक्रम सिंह और मृत्यु-दण्ड की सजा प्राप्त अन्य व्यक्ति ने २०१३ में भारतीय पैनल संहिता के अनुच्छेद ३६४ए की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुये अपील दायर की।[24]

अन्य कानूनसंपादित करें

भारतीय दण्ड संहिता के साथ-साथ भारतीय संसद द्वारा कानूनों की नयी शृंखला अधिनियमित की गयी जिनमें मौत की सजा का प्रावधान है।

बड़े अपराधसंपादित करें

हत्या

भारतीय दण्ड संहिता (भादसं) में अनुच्छेद अथवा अन्य नियम अपराध की प्रकृति
भादसं का 120बी दोषी षड्यंत्र की हिस्सा होना
भादसं का 121 भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध संचालित करना,

इसके लिए उकसाना चालू करनाअथवा लड़ाई करना।

भादसं का 132 सैनिक विद्रोह के लिए उकसाना (यदि परिणामस्वरूप सैनिक विद्रोह होता है) अथवा इसमें शामिल होना।
भादसं का 194 मौत की सजा के सिद्ध हो जाने के बाद झूठे सबूत देना
भादसं के 302, 303
भादसं का 305 नाबालिग अथवा मानसिक रोगी अथवा मदहोश व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाना
सती निवारण अधिनियम के अनुच्छेद 4 के भाग II सती कार्य में सहयोग अथवा उकसाना
भादसं का 364A अपहरण, जिसमें शिकार व्यक्ति को फिरौती अथवा अन्य किसी बलपूर्वक कार्य को पूर्ण करने के लिए काम में लिया गया हो।
मादक पदार्थ और साइकोट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम के 31ए मादक पदार्थों की तस्करी के अपराध को दोहराना
भादसं का 396 डकैती के साथ हत्या – पाँच और इससे अधिक लोग एक ही समय पर डकैती कर रहे हों और उसी समय कोई एक व्यक्ति अपराध को अंजाम देता है, तो डकैती की घटना में शामिल सभी सदस्य मौत की सजा के उत्तरदायी होंगे।
भादसं के 376ए और आपराधिक अधिनियम (संशोधन), 2013 बलात्कार की घटना जिसमें अपराधी को ऐसी पीड़ा पहुँचे जिसके परिणामस्वरूप उसकी मौत हो जाये अथवा अपनी अवस्था खो दे अर्थात मानसिक अथवा अन्य तरह का संतुलन खो देना, अथवा इस तरह के अपराध की पुनरावृत्ति[25]
बॉम्बे अधिनियम (गुजरात संशोधन) बिल, 2009 केवल गुजरात में – विषाक्त शराब का निर्माण करना अथवा बेचना जिसमें किसी की मौत हो गयी हो।[26][27]

दया याचिकासंपादित करें

एक सत्र न्यायालय द्वारा मौत की सजा देने के बाद, उच्च न्यायालय द्वारा इसकी अंतिम पुष्टि होनी चाहिए। पुष्टि के बाद, अपराधी को सर्वोच्च न्यायालय से अपील करने का विकल्प होता है। अगर यह संभव नहीं है, या यदि सर्वोच्च न्यायालय याचिका को सुनकर या अपील को अस्वीकार कर देता है, तो अपराधी व्यक्ति भारत के राष्ट्रपति और राज्य के राज्यपाल को दया याचिका प्रस्तुत कर सकता है।

ऐतिहासिक दृष्टि से राष्ट्रपति और राज्यपाल को यह अधीकार भारत सरकार अधिनियम, १९३५ से आते है। पर भारत के संविधान के खंड ७२ (१) के तहत हि इन अधिकारों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Majumder, Sanjoy.
  2. "Yakub Memon, third terror convict executed in 4 years" Archived 4 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  3. "Explained: In the Supreme Court, some questions of Life and Death" Archived 19 अप्रैल 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  4. "Yakub Memon case: Death penalty in India, by the numbers" Archived 28 अप्रैल 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  5. "भारत में फाँसी की सज़ा पर एक नज़र" Archived 26 अगस्त 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  6. "'Just 4 of 26 hanged since '91 Muslims'" Archived 20 मार्च 2020 at the वेबैक मशीन.. 
  7. VENKATESAN, V. (7 September 2012). सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; ":1" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है
  8. "'Number of executions much higher than 52 Archived 22 जनवरी 2009 at the वेबैक मशीन..'"
  9. "Death penalty cannot be arbitrarily imposed: Expert" Archived 15 अगस्त 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  10. "Trial courts give death freely, but just 5% confirmed" Archived 8 जून 2018 at the वेबैक मशीन.. 
  11. "Death penalty files 'lost, eaten by termites'" Archived 16 नवम्बर 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  12. "72 Muslims Hanged in India against 1,342 Hindus and Others" Archived 13 मई 2016 at the वेबैक मशीन.. 
  13. "Data on death penalty convicts goes 'missing'" Archived 24 सितंबर 2015 at the वेबैक मशीन.. 
  14. "General Assembly GA/10678 Sixty-second General Assembly Plenary 76th & 77th Meetings" Archived 11 दिसम्बर 2013 at the वेबैक मशीन..
  15. "General Assembly GA/11331 , Sixty-seventh General Assembly Plenary 60th Meeting" Archived 8 जुलाई 2014 at the वेबैक मशीन.. 20 December 2012.
  16. "End death penalty, keep it only for terror: Law panel tells government" Archived 31 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.. 1 September 2015.
  17. "Yakub Memon first to be hanged in Maharashtra after Ajmal Kasab" Archived 28 सितंबर 2015 at the वेबैक मशीन.. 30 July 2015.
  18. "A case against the death penalty" Archived 11 मई 2014 at the वेबैक मशीन.. 
  19. "Rajendra Prasad vs. Archived 4 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.
  20. "Jagmohan Singh vs. Archived 5 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.
  21. "Bachan Singh vs. Archived 23 फ़रवरी 2016 at the वेबैक मशीन.
  22. "Honour killings: India's top court calls for death penalty" Archived 25 सितंबर 2015 at the वेबैक मशीन..
  23. "Hang cops involved in fake encounters: Supreme Court" Archived 4 नवम्बर 2014 at the वेबैक मशीन..
  24. "Is death for kidnap and ransom fair?" Archived 22 फ़रवरी 2014 at the वेबैक मशीन.
  25. "संग्रहीत प्रति" (PDF). मूल से 19 दिसंबर 2016 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 22 अप्रैल 2016.
  26. "Gujarat introduces death penalty for toxic alcohol" Archived 5 जुलाई 2016 at the वेबैक मशीन..
  27. "Bengal hooch tragedy: Alcohol among major global killers" Archived 31 अक्टूबर 2017 at the वेबैक मशीन..