स्थिति एवं विस्तार-

भूमध्य रेखा के उत्तर तथा दक्षिण में 5°अक्षांश से 10° अक्षांश तक विस्तृत जलवायु प्रदेश को विषुवत रेखीय भूमध्य रेखीय जलवायु प्रदेश कहते हैं।इसका विस्तार कभी कभी 15° से 20° अक्षांश तक भी पाया जाता है। वायुदाब पेटी में खिसकाव के कारण इसका प्रसार या संकुचन होता रहता है। इसका विस्तार दक्षिणी अमेरिका के उत्तर,उत्तर अफ्रीका के मध्य में तथा दक्षिण पूर्वी एशिया महाद्वीप में है ।दक्षिणी अमेरिका में अमेजन बेसिन, इक्वेडोर तथा उत्तरी पश्चिमी तट, अफ्रीका में कांगो बेसिन, गिनी तट तथा पूर्वी तट तथा एशिया में पूर्वी दीप समूह ,मलाया प्रायद्वीप व फिलीपींस तथा पूर्वी मध्य अमेरिका में पनामा, निकारागुआ,होंडुरास ग्वाटेमाला आदि इसी प्रदेश में सम्मिलित है ।

जलवायु -

भूमध्य की प्रदेशों में वर्ष भर जलवायु सामान अर्थात उष्ण व तर रहती है। सूर्य लगभग वर्षभर लंबवत चमकता है तथा वर्ष पर्यंत रात व दिन की अवधि में भी बहुत कम अंतर रहता है । इन प्रदेशों में वर्षभर ऊंचे तापमान रहते हैं औसत तापमान 27℃ एवं वार्षिक तापांतर केवल 2℃ से 3℃ मिलता है।

दिन का तापमान यद्यपि बहुत अधिक नहीं होता है किंतु अधिक ऊष्मा, प्रखर प्रकाश, मंद वायु तथा उच्च आद्रता के कारण मौसम असहनीय हो जाता है। यहां शीत ऋतु नही होती है तथा वर्ष भर संवाहनीय वर्षा होती है ।

वर्षा प्रायः रोजाना सायं काल 4:00 से प्रारंभ हो जाती है जो कि बहुत तेज व मूसलाधार होती है। वर्षा का वार्षिक औसत तटीय एवं पर्वतीय भागों में क्रमशः 200 से 300 सेंटीमीटर है।

वर्षा की अधिकता के कारण यहां पर दलदल बन जाते हैं। यहां मेघ अधिक छाया रहता है ।प्रायः कपासी बादल पाए जाते हैं दिन में अधिक तापमान वाले समय मे बादल अधिक रहते है, जबकि रात्रि तथा सांय काल के समय आकाश स्वच्छ रहता है ।

प्राकृतिक वनस्पति -

उच्च तापमान एवं भारी वर्षा के फलस्वरूप भूमध्यरेखीय प्रदेशों में सघन व सदाबहार वन मिलते हैं। ये वर्षभर हरे-भरे एवं इतने सघन होते हैं कि सूर्य की किरणें भी इनमें प्रवेश नहीं कर पाती है।

मुख्य वृक्ष महोगनी , सिनकोना, आबनूस ,एबोनी, एबनुस ,चंदन ,रबड़, बेेेत आदि है । यहाँ वृक्षों पर अनेक बेल तथा लताएं उग आती है ।वनों में अनेक प्रकार के प्राणी बहुतायत में पाए जाते हैं ।