भूसन्नति (अंग्रेज़ी: Geosyncline) भूविज्ञान तथा भूआकृतिविज्ञान की एक अपेक्षाकृत पुरानी संकल्पना और शब्द है जिसका व्यवहार अभी भी कभी-कभी ऐसे छिछले सागरों अथवा सागरीय द्रोणियों के लिए किया जाता है जिनमें अवसाद जमा होने और तली के धँसाव की प्रक्रिया चल रही हो।[1][2] सर्वप्रथम इस तरह का विचार अमेरिकी भूवैज्ञानिक जेम्स हाल और जेम्स डी डाना द्वारा प्रस्तुत किया गया था और इसके द्वारा पर्वतों की उत्पत्ति की व्याख्या करने वाले सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया था। हालाँकि, प्लेट टेक्टॉनिक्स सिद्धांत के बाद यह परिकल्पना अब पुरानी पड़ चुकी है।

हाल और डाना ने भूसन्नतियों की परिकल्पना एप्लेशियन पर्वत की उत्पत्ति की व्याख्या प्रस्तुत करने के लिए की थी[3] और बाद में जर्मन भूवैज्ञानिक कोबर ने अपना पर्वत निर्माण का "भूसन्नति सिद्धांत" भी प्रस्तुत किया और अल्पाइन पर्वतों (ऍटलस, ऐल्प्स और हिमालय इत्यादि) के निर्माण की व्यख्या दी। [4]


सन्दर्भसंपादित करें

  1. Selley, Richard C., Applied Sedimentology, Academic Press, 2nd edition, 2000, p. 486 ISBN 978-0-12-636375-3
  2. J. A. Steers, Unstable Earth
  3. Adolph Knopf, The Geosynclinal Theory Archived 2016-01-02 at the Wayback Machine, Bulletin of the Geological Society of America 59:649-670, July 1948
  4. सिंह, सवींद्र (2010), भौतिक भूगोल की रूपरेखा, प्रयाग पुस्तक भवन, इलाहाबाद, पृ. 168 - 79