भैरौं या भैरौंनाथ एक प्रसिद्ध तांत्रिक हैं कई जगह पर अघोरी साधु के रूप में वर्णित भैरौंनाथ असल में एक दैत्य कुल से थे सतयुग में इनके पूर्वज दैत्यराज का संहार भी माता वैष्णो देवी ने किया था। भैरौंनाथ भगवान शिव के अवतार गोरखनाथ के शिष्य थे। गोरखनाथ के गुरु का नाम मत्स्येन्द्रनाथ था। कहतें हैं कि भैरौंनाथ बाबा अपने गुरु गोरखनाथ की इच्छा को उनका आदेश मानते थे और बाबा गोरखनाथ के आदेशों का सदैव पालन करते | बाबा भैरौंनाथ का मुख्य अस्त्र तलवार है। भैरौंनाथ का वध वैष्णो देवी ने जिस जगह पर किया था वह जगह भवन के नाम से प्रसिद्ध है यहाँ देवी महाकाली(दाएं) , देवी महालक्ष्मी(मध्य) और देवी महासरस्वती (बांए) विराजमान हैं। भैरौंनाथ का वध करने के बाद उनका शीश ३किमी दूर जाकर गिरा उस जगह को भैरौंनाथ मंदिर और भैरौं घाटी कहतें हैं । मरते हुए जब भैरौंनाथ अपनी भूल का अहसास हुआ था और जब माँ से क्षमा याचना की तब माँ ने उन्हें वरदान दिया कि उनकी भी पूजा होगी और जन्म मृत्यु के चक्र से भैरौंनाथ को मुक्ति दिलाई माँ ने कहा था "कि आज से तुम्हारी भी पूजा होगी मेरे दर्शन तब तक पूरे नहीं होंगे जब तक कोई मेरे बाद तुम्हारे के दर्शन नहीं करेगा"। माँ वैष्णों देवी के भवन से भैरौंनाथ बाबा का मंदिर ३किमी दूर है। भैरौंनाथ को मांस मदिरा आत्याधिक संख्या में चढ़ती है किन्तु अब बलि की जगह अधिक संख्या में नारियल फोड़े जाते हैं | मदिरा चढाने की परंपरा अभी तक ख़तम नहीं हुई कई जगह पर बाबा भैरौंनाथ के मंदिर में मदिरा को गिलास में निकालकर बाबा को पिलाई जाती है उन जगहों के पुजारियों का मानना है कि साक्षात् बाबा भैरौंनाथ मदिरा पिने आतें हैं | कहतें हैं की यदि भैरौंनाथ को कोई मदिरा का भोग लगाकर किसी गरीब को पिलाये तो भैरौंनाथ जी की कृपा भी उस पर सदैव बनी रहती है यदि माँ वैष्णों देवी को प्रसन्न करना हो तो बाबा भैरौंनाथ को प्रसन्न करना आवश्यक है और भैरौंनाथ बाबा को प्रसन्न करना हो तो माँ वैष्णों देवी को प्रसन्न करना आवश्यक है | बाबा भैरौंनाथ की चार भुजाएँ हैं जिनमें तलवार , मदिरा और मांस रहता है चौथा हाथ अभय मुद्रा में रहता है | वैष्णव देवी की तरह ही उत्तर भारत मे एक और प्रसिद्ध सिद्धपीठ है माँ शाकम्भरी देवी सहारनपुर। इसकी गिनती शक्तिपीठों मे भी होती है। यहाँ पर भी भैरौंनाथ जी का मंदिर है जिसमे प्रथम दर्शन अनिवार्य है क्योंकि यहाँ पर भी माता रानी ने भैरौंनाथ जी को प्रथम पूजा का वरदान दिया था काफी लोग भैरौंनाथ और शिवावतार भैरव को एक मान लेते हैं जबकि शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ मे जो भैरव है वो कालभैरव के अवतार है। नवरात्रि में भैरौंनाथ के रूप में एक लड़के की आवश्यकता होती है। तांत्रिक और अघोरी साधु बाबा भैरौंनाथ को अपना गुरु मानतें हैं।

भैरौं बाबा का मंदिर