मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी भोपाल में जुलाई 1969 से हिन्दी ग्रंथ अकादमी स्थापित है। संस्था का दायित्व केन्द्र प्रवर्तित योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय स्तर की 25 विषयों की पाठयपुस्तकों के साहित्य को हिन्दी में प्रकाशित कर उपलब्ध कराना है। अकादमी द्वारा अब तक विभिन्न विषयों की सैकड़ों पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है। मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी का अपना स्वयं का प्रशासनिक भवन है। मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी द्वारा छात्र-छात्राओं के लिये 'न लाभ न हानि' के सिद्धांत पर पुस्तकें सुलभ करायी जाती हैं। अकादमी विभिन्न ३५ विषयों में १००० से अधिक ग्रन्थों का प्रकाशन कर चुकी है। इनमें सभी संकायो की पुस्तकें शामिल हैं। दुर्लभ पाठ्य सामग्री के अनुवाद भी प्रकाशित किये जाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अकादमी के अनेक आलेख एवं ग्रन्थों को प्रकाशित किया जाता है।

परिचयसंपादित करें

क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों हेतु पाठ्य सामग्री का निर्माण किये जाने की भारत सरकार, मानव संसाधन मंत्रालय की केन्द्र प्रवर्तित योजनान्तर्गत सरकार द्वारा रियायती दरों पर प्राप्त कागज से मुद्रण तथा प्रकाशन हेतु म.प्र. हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की स्थापना जुलाई १९६९ में की गई थी। केन्द्र सरकार ने पॉचवी पंचवर्षीय योजना से अकादमी का अनुदान देने का प्रावधान किया। योजनान्तर्गत इंजीनियरी, चिकित्सा एवं कृषि तथा संदर्भित ग्रन्थ एवं सांस्कृतिक और साहित्यिक तथा सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित प्राप्त पांडुलिपियों से पाठ्य सामाग्री तैयार करायी जाती है। यह कार्य केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय के निर्देशन में किया जाता है।

इस प्रकार की सामग्री का प्रकाशन कराने हेतु एक ओर जहां छात्रों का उत्कृष्ट पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना है वहीं क्षेत्रिय साहित्य तथा स्थानीय प्राप्त सामग्री के आधार पर भुगोल,इतिहास,पुरातत्व से संबंधित अनेक पाठ्य सामग्री तैयार करायी जाती है जिसे छात्र संदर्भ ग्रन्थ के रूप में उपयोग करते है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें