सत्संग योग के लेखक| नाम=महर्षि मेंहीं | उपनाम=रामानुग्रहलाल| जन्मतारीख़=विक्रमी संवत् १९४२ के वैसाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तदनुसार 28 अप्रैल, सन् 1885 ई. मंगलवार )| जन्मस्थान=पूर्णियां, (हाल में मधेपुरा, बिहार; भारत निर्वाण=8 जून, सन 1986 ई. रविवार। निर्वाणस्थल=कुप्पाघाट, भागलपुर, बिहार भारत। कार्यक्षेत्र=बिहार, कलकत्ता, दिल्ली, पंजाब, अमेरिका, रूस और संपूर्ण भारत। केले और बांस की खेतीकर स्वावलंबी जीवन बिताते हुए सत्संग ध्यान का प्रचार करना। राष्ट्रीयता=भारतीय। भाषा= भारती (हिन्दी), मैथिली, अंग्रेजी, बंगाली। काल=भक्ति काल, सन् 1885 से 1986 तक। विधा=कविता, लेख, टीकाकरण आदि। विषय=सामाजिक, आध्यात्मिक| आन्दोलन=भक्ति आंदोलन प्रमुख कृति=सत्संग योग, रामचरितमानस सार सटीक, श्रीगीता-योग-प्रकाश, महर्षि मेंही पदावली आदि। प्रभाव=सिद्ध, प्रभावित=डाक्टर, भक्त, वकील, विदेशी, विद्वान, संन्यासी, साहित्यकार, महर्षि संतसेवी परमहंस, शाही स्वामी जी महाराज।

महर्षि मेंहीं
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जन्म रामानुग्रह लाल दास
28 अप्रैल 1885
धराहरा , बनमनखी Purnea District, India
स्मारक समाधि कुप्पाघाट, Bhagalpur, Bihar, India
राष्ट्रीयता भारतीय
अन्य नाम मेंहीं दास, गुरु महाराज, रामानुग्रह लाल दास
प्रसिद्धि कारण

गुरु of संतमत

Propounding the philosophy of Sant Mat and Advaita Vedanta His main motto: "मानव जन्म का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है, सभी सांसारिक इच्छाओं को पूरा करना, और सभी दु:क्यों से पूर्ण मुक्ति। संतमत का उद्देश्य एक ऐसी प्रणाली प्रदान करता है जो उपर्युक्त बातें पूरा करती है."
अंतिम स्थान कुप्पाघाट, Bhagalpur, Bihar, India

महर्षि मेंहीं या सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज 19वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। इनकी रचनाओं ने भारती (हिन्दी) प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनके लेखन आधुनिक विद्वानों के साहित्यों मेंं मिला करता है।[1] ये परम प्रभु परमात्मा, (ईश्वर, God, वाहेगुरु) की उपासना अपने शरीर के अंदर ही [बिंदु ध्यान] और नाद ध्यान की साधना द्वारा करने में विश्वास रखते थे। इन्होंने सामाजिक भेड़िया धसान भक्ति की निंदा की, सामाजिक बुराइयों (झूठ, चोरी, नशा, हिंसा और व्यभिचार) की सख़्त आलोचना अपने प्रवचनों में की,[2] गीता में फैले भ्रामक विचारों पर इन्होंने बहुत प्रकाश डाला है।[3] सत्संग योग की रचना कर इन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सभी पहुंचे हुए संतों एवं वैदिक धर्मावलंबियों के विचारधारा एक हैं।[4] इन्होंने संतमत परंपरा[5] को आगे बढ़ाते हुऐ संतमत बहुत ही विस्तार किए। इसके साथ-साथ संतमत सत्संग की एक निश्चित प्रणाली का विकास करके प्रचार-प्रसार करने की नियमावली तैयार की।


महर्षि मॅहीं साहित्य - सुमनावली-संपादित करें

1 . सत्संग - योग ( चारो भाग ) 2 . विनय - पत्रिका - सार सटीक 3 . महर्षि मॅहाँ - वचनामृत , प्रथम खंड 4 . सत्संग - सुधा , प्रथम भाग 5 . सत्संग सुधा , द्वितीय भाग 6 . सत्संग - सुधा , तृतीय भाग 7 . सत्संग - सुधा , चतुर्थ भाग 8 . भावार्थ - सहित घटरामायण - पदावली 9 . वेद दर्शन - योग 10 . ईश्वर का स्वरूप और उसकी प्राप्ति 11 . ज्ञान - योग - युक्त ईश्वर भक्ति 12 . संतवाणी सटीक 13 . श्रीगीता - योग - प्रकाश 14 . रामचरितमानस - सार सटीक 15 . मोक्ष दर्शन 16 . महर्षि मॅहीं - पदावली 17 . महर्षि मेंहीं सत्संग - सुधा सागर 1 . 18 . महर्षि मेंहीं सत्संग - सुधा सागर 2

प्राप्ति स्थान

. प्रकाशन विभाग, महर्षि मेंहीं आश्रम , कुप्पाघाट , भागलपुर - ३ ( बिहार ) 812003

. सत्संग ध्यान ऑनलाइन स्टोर


सन्दर्भसंपादित करें

  1. परशुराम, चतुर्वेदी. उत्तरी भारत के संत परंपरा.
  2. सत्संग, ध्यान. "महर्षि मेंही प्रवचन सीरीज". सत्संग ध्यान blogspot.com. मूल से 11 जुलाई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020.
  3. सत्संग, ध्यान. "संग्रहीत प्रति". satsangdhyan geeta. सत्संग ध्यान. मूल से 11 जुलाई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020.
  4. सत्संग, ध्यान. "सत्संग योग का परिचय". सत्संग ध्यान डॉट कॉम. सत्संग ध्यान. मूल से 11 जुलाई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 12 जुलाई 2019.
  5. "संतमत का इतिहास". संत मेही डॉट कॉम. संत मेही डॉट कॉम. मूल से 6 फ़रवरी 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 जनवरी 2020.