महोगनी जीनस स्वेतेनिया की उष्णकटिबंधीय दृढ़ लकड़ी प्रजातियों की एक सीधे-दानेदार, लाल-भूरे रंग की इमारती लकड़ी है, जो अमेरिका का स्थानीय वृक्ष है, और उष्णकटिबंधीय चिनबेरी परिवार, मेलियासी का हिस्सा है।

महोगनी का वृक्ष

==सन्दर्भ==महोगनी

नन्द किशोर मीणा ग्राम नागदा जिला श्योपुर मध्य प्रदेश = महोगनी एक औसधिय पोधा है ये मूल रूप से अमेरिका कि प्रजाति है इसकी अन्तर्राष्ट्रीय मार्केट में बहुत ज्यादा मांग को देखते हुए अमेरिका ने 1990 में इसके निर्यात पर रोक लगा दी थी जिसके बाद भारत, बांग्लादेश, नेपाल, मयाननमर जैसे देशों में इसकी बागवानी की जाने लगी महोगनी के पोधे की फल, पत्ती, लकड़ी सभी की देश और दुनिया में बहुत डिमांड है महोगनी की पत्तियों का इस्तेमाल केंसर, अस्थमा, मधुमेह, सर्दी जुखाम आदि रोगों की दवा बनाने में किया जाता है इसके बीजों का इस्तेमाल भी कई प्रकार के रोगों में किया जाता हैं इसके पोधे 5 साल में एक बार बीज देते हैं एक पोधे से 5 किलो बीज मिलते है इसके बीज 1000 रुपए प्रति किलो तक बिक जाते है इसकी लकड़ियों का इस्तेमाल बंदूक के बट, पानी के जहाज, भूकंप रोधी मकान, वाध यंत्र, फर्नीचर आदि में किया जाता हैं इसकी लकड़ी की कीमत 2200 रुपए प्रति घन फुट हैं इसके पूर्ण विकसित पॊधे की लंबाई 70 से 90 फीट तक होती है इसके 1000 पोेधे लगाने में किसान का करीब 150000 रुपए का खर्च आता है जिससे 10 से 12 साल में एक करोड़ तक की कमाई की जा सकती हैं इसके पोधे को खेत में नहीं लगाए तो बॉर्डर पर भी लगा सकते हैं ये एक साल में 10 से 15 फीट तक बड़ सकता है