मुकाम

मुक्ति धाम मुकाम, गांव-हिमटसर ,नोखा जिला-बीकानेर,राजस्थान

मुकाम (बीकानेर) में प्रवर्त्तक गुरु जम्भेश्वर का मंदिर बना हुआ है जिसे मुक्ति धाम मुकाम कहते है जो बिश्नोई समुदाय का मुख्य तीर्थ स्थल है ।[1]

मुक्ति धाम मुकाम मंदिर
बिश्नोई मन्दिर मुक्तिधाम मुकाम-नोखा, बिकानेर, राजस्थान 2014-02-08 23-08.jpeg
निज मंदिर मुक्ति धाम मुकाम
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताहिंदू धर्म
डिस्ट्रिक्टबीकानेर
देवताविष्णु
शासी निकायअखिल भारतीय बिश्नोई महासभा
विविध
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिनोखा, बीकानेर
राज्यराजस्थान
देशFlag of India.svg भारत
मुकाम की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
मुकाम
राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
भौगोलिक निर्देशांक27°37′N 73°37′E / 27.62°N 73.61°E / 27.62; 73.61निर्देशांक: 27°37′N 73°37′E / 27.62°N 73.61°E / 27.62; 73.61
वास्तु विवरण
प्रकारमंदिर
शैलीहिन्दू मंदिर स्थापत्य

धार्मिक परम्परासंपादित करें

यहां पर गुरू जाम्भोजी की पवित्र समाधि हैं। इसी कारण समाज में सर्वाधिक महत्त्व मुकाम का ही हैं। इसके पास ही पुराना तालाब गांव हैं। कहा जाता हैं कि गुरु जाम्भोजी ने अपने स्वर्गवास से पूर्व समाधि के लिये खेजड़ी एवं जाल के वृक्ष को निशानी के रूप में बताया और कहा था कि वहां 24 हाथ की खुदाई करने पर शिवजी का धुणा एवं त्रिशूल मिला था वही आज समाधि पर बने मन्दिर पर लगा हुआ है और खेजड़ा मन्दिर परिसर में स्थित हैं। मुकाम में वर्ष में दो मेले लगते है एक फाल्गुन की अमावस्या को तथा दूसरा आसोज की अमावस्या को। फाल्गुन की अमावस्या का मेला तो प्रारम्भ से ही चला आ रहा आसोज मेला संत वील्होजी ने सम्वत् 1648 में प्रारम्भ किया था। आजकल हर अमावस्या को बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंंचने प्रारंम्भ हो गयें हैं । कई वर्षो से मुकाम में समाज की ओर सें निःशुल्क भण्डारे की व्यवस्था हैं। मुकाम में पहुंचने वाले सभी जातरू समाधि के दर्शन करते हैं और धोक लगाते हैं। सभी मेंलों पर यहां बहुत बढ़ा हवन होता है जिसमेें कई किवंटल शुद्ध देसी घी एवं खोपरों (नारियलों) से आहुति दी जाती है। घी खोपरों (नारियलों) कें साथ-साथ जातरू पक्षियों के लिये चूगा (अनाज)भी चुगाघर में डालते हैं जिसे पक्षीयों के वर्ष भर चूगा चूगाने कि व्यवस्था कायम कि हुईं जो बहुत अच्छे से शुचारू रहती हैं। अब समाधि पर बने मन्दिर का जीर्णोद्धार करके एक भव्य मन्दिर बना दिया गया हैं । समाधि पर बने मन्दिर को निज मन्दिर भी कहते हैं । मुकाम मेलों में आनें वाले लोगों के ठहरने के लिए समाज की अनेक धर्मशालाएं हैं ।मुकाम में बिश्नोई समाज के लोगों कि व्यतिगत अलग-अलग गांवों कि साधु-संतो कि धर्मशालाएं बनीं हुई हैं।मुकाम मेलों की समस्त व्यवस्था का नेतृत्व अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा करती हैं एवं अखिल भारतीय गुरू जम्भेश्वर सेवक दल द्वारा व्यवस्था में सहायता की जाती है।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "मुकाम में फाल्गुन मेला: छह मार्च को होगा समाज का खुला अधिवेशन, गुरु की समाधि पर लगाएंगे धोक". Patrika News (hindi में). मूल से 17 नवंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-02-07.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें