मूल्य के श्रम सिद्धान्त (labor theory of value (LTV)) के अनुसार किसी वस्तु या सेवा का आर्थिक मूल्य उस वस्तु या सेवा के उत्पादन के लिए आवश्यक कुल सामाजिक श्रम से निर्धारित होता है, न कि उस वस्तु या सेवा की उपयोगिता से। वर्तमान समय में प्रायः मार्क्सवादी अर्थशास्त्री ही इस सिद्धान्त में विश्वास रखते हैं।

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