मौर्यपुत्र

भगवान महावीर के ७ वें गणधर (शिष्य)

मौर्यपुत्र भगवान महावीर के ७ वें गणधर(शिष्य) थे।[1] भगवान महावीर के जीवन काल मे ही इन्होंने निर्वाण प्राप्त किया।[2]

मौर्यपुत्र की शंकासंपादित करें

प्रत्येक गणधर को अपने ज्ञान में कोई ना कोई शंका थी, जिसका समाधान भगवान महावीर ने किया था, मौर्यपुत्र के मन में शंका थी कि, क्या देवता होते हैं या नहीं?

सन्दर्भसंपादित करें