मौलिक बल (fundamental force):- प्रकृति में चार मौलिक बल पाये जाते हैं जिसमें गुरुत्वीय और विद्युत चुंबकीय बल से साधारणतया हम परिचित है। पर दो नये बल, सशक्त बल और दुर्बल बल का परिचय नाभकीय स्तर पर होता है। जब दो प्रोटॉन एक दूसरे के सम्पर्क में आते हैं तो वे प्रकृति के सभी चारो बलो का अनुभव करते हैं। दुर्बल बल बीटा-क्षय को संचालित करते हैं और न्यूट्रीनो को नाभिक से बांधकर रखते हैं। सशक्त बल जिसे प्रायः नाभकीय बल कहा जाता है वास्तव में क्वार्को को आपस में बांधकर बेर्यॉन (तीन क्वार्क) और मेसॉन (एक क्वार्क + एक एन्टी क्वार्क) बनाते हैं। इसी तरह इलेक्ट्रॉन नाभिक से विद्युत चुंबकीय बल से जुड़ा होता है। गुरुत्वीय बल का सीधा संबंध द्रव्यमान से है। दो कणो के बीच गुरुत्वीय बल दोनो कणो के द्रव्यमान और बीच की दूरी पर निर्भर करता है। गुरुत्वीय और विद्युत चुंबकीय बल की सीमा अनंत होती है पर दूरी के साथ इसकी ताकत घटती जाती है। सशक्त और दुर्बल बल की सीमा अत्यंत सीमित होती है।

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मूलभूत कण और मूलभूत बल