यमक अलंकार

एक ही शब्द का प्रयोग दो बार और दोनों बार अर्थ अलग।
(यमक से अनुप्रेषित)

परिभाषासंपादित करें

जब एक शब्द प्रयोग दो बार होता है और दोनों बार उसके अर्थ अलग-अलग होते हैं तब यमक अलंकार होता है।

उदाहरणसंपादित करें

  • ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहन वारी, ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहाती हैं।

यहाँ पर मन्दर के अर्थ हैं अट्टालिका और गुफा

  • कनक-कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय, या खाये बौराय जग, वा पाये बौराय।

यहाँ पर कनक के अर्थ हैं धतूरा और सोना।

  • सजना है मुझे सजना के लिए

यहाँ पर एक 'सजना' का अर्थ 'सजना - सँवरना' तथा दूसरे 'सजना' का अर्थ 'पति' से है

  • काली घटा का घमंड घटा।

ऊपर के वाक्य में आप देख सकते हैं की ‘घटा’ शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। पहली बार ‘घटा’ शब्द का प्रयोग बादलों के काले रंग की और संकेत कर रहा है।

दूसरी बार ‘घटा’ शब्द बादलों के कम होने का वर्णन कर रहा है। अतः ‘घटा’ शब्द का दो बार प्रयोग और अलग अलग अर्थ के कारण उक्त पंक्तियों में यमक अलंकार की छटा दिखती है।

संदर्भसंपादित करें

हम जानते हैं की जब शब्द की एक से ज़्यादा बार आवृति होती है एवं विभिन्न अर्थ निकलते हैं तो वहाँ यमक अलंकार होता है।

अतः ये सारे उदाहरण यमक अलंकार के अंतर्गत आएँगे।