यशोदा को पौराणिक ग्रंथों में नंद की पत्नी कहा गया है। भागवत पुराण में यह कहा गया है देवकी के पुत्र भगवान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी के गर्भ से मथुरा के राजा कंस के कारागार में हुआ। कंस से रक्षा करने के लिए जब वासुदेव जन्म के बाद आधी रात में ही उन्हें यशोदा के घर गोकुल में छोड़ आए तो उनका का पालन पोषण यशोदा ने किया।

यशोदा और नंद कृष्ण को झुलाते हुए।
बालक कृष्ण को स्नान कराती यशोदा- भागवद पुराण की एक हस्तलिपि से १५वीं शती।

यशोदा और कृष्णसंपादित करें

भारत के प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में बालक कृष्ण की लीलाओं के अनेक वर्णन मिलते हैं। जिनमें यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन[1], माखनचोरी और उसके आरोप में ओखल से बाँध देने की घटनाओं[2] का सूरदास ने सजीव वर्णन किया है[3]। इन पदों में सूर का वर्णन वात्सल्य रस की प्रतीति भक्तिरस के रूप में व्यक्त हुई है[4].।

यशोदा और बलरामसंपादित करें

यशोदा ने बलराम के पालन पोषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो रोहिणी के पुत्र और सुभद्रा के भाई थे। उनकी एक पुत्री का भी वर्णन मिलता है जिसका नाम एकांगा था।

गैलरीसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "कृष्ण और यशोदा की कथा". मूल से 14 सितंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मार्च 2008.
  2. "ओखले से बंधे कृष्ण". मूल से 16 अक्तूबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मार्च 2008.
  3. "मातृ वचन". मूल से 9 जून 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मार्च 2008.
  4. "वात्सल्य". मूल से 9 जून 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 मार्च 2008.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

श्री कृष्ण की मौत कैसे हुई

कृष्ण और यशोदा की कथा