युक्तिदीपिका, सांख्यकारिका की एक प्राचीन व्याख्या है। यह अन्य व्याख्याओं की तुलना में अधिक विस्तृत है। इसके रचनाकाल तथा रचनाकार के बारे में निश्चयपूर्वक कुछ कह पाना कठिन है। इसमें ११ आह्निक (अध्याय) हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

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