हिन्दू पौराणिक कथाओं में, रक्तबीज एक असुर (दैत्य) था जिसने शुम्भ-निशुम्भ के साथ मिलकर देवी दुर्गा और काली देवी के साथ युद्ध किया। वह महर्षि कश्यप का दिति के गर्भ से उत्पन्न पुत्र था।

धार्मिक मान्यता संपादित करें

धार्मिक मान्यता के अनुसार वह एक ऐसा दैत्य था जिसे यह वरदान था की जब जब उसके लहू की बूंद इस धरती पर गिरेगी तब तब हर बूंद से एक नया रक्तबीज जन्म ले लेगा जो बल , शरीर और रूप से मुख्य रक्तबीज के समान ही होगा।[1]

पूर्व जन्म संपादित करें

ऐसी मान्यता है कि रक्तबीज अपने पूर्व जन्म में रम्भ नाम का दानव था और उस जन्म में भी प्रजापति कश्यप का ही पुत्र था। उस जन्म में उसकी माता दनु थी। उस जन्म में उसके सौतले बड़े भाई देवराज इन्द्र के हाथों वह मृत्यु को प्राप्त हुआ था।

सन्दर्भ संपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 अक्तूबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 अक्तूबर 2018.