रतन नाथ धर सरशार (जन्म - १८४६ - मृत्यु १९०३) उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार थे। इनके लेखन के प्रसंशकों में हिंदी और उर्दू के प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रेमचंद भी शामिल थे। उनके द्वारा रचित उपन्यास फसाना-ए-आज़ाद का प्रकाशन १८७८ से १८८५ के मध्य धारावाहिक रूप से उनके अखबार अवध अखबार में हुआ। इस नॉवेल का हिन्दी अनुवाद प्रेमचंद ने आजाद कथा नाम से प्रकाशित किया और इसको आधार बनाकर शरद जोशी ने ८० के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक वाह जनाब की भी रचना की[1]

संदर्भसंपादित करें

  1. Report (अंग्रेज़ी में). 1985.