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रमणिका गुप्ता ने विमर्श के रूप में हिंदी साहित्य में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। वे एक सामाजिक कार्यकर्ता तथा साहित्यकार थीं। उन्होंने आदिवासी जीवन पर कई पुस्तकें लिखी हैं।

Image ramnikagupta
रमणिका गुप्ता
जन्म२२ अप्रैल, १९३०
सुनाम, पंजाब, भारत
मृत्यु२६ मार्च, २०१९
नई दिल्ली, भारत
व्यवसायलेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता
राष्ट्रीयताभारतीय
अवधि/कालआधुनिक काल
विधाsविमर्श
विषयsसामाजिक
उल्लेखनीय कार्यsआपहुदरी

अनुक्रम

परिचयसंपादित करें

उनका जन्म २२ अप्रैल १९३० को पंजाब के सुनाम नामक स्थान पर तथा निधन २६ मार्च २०१९ को नई दिल्ली में हुआ। मृत्यु से पूर्व वे झारखंड में मांडू के विधायक पद पर कार्यरत थीं।

रचनाएँसंपादित करें

विमर्शसंपादित करें

  • आदिवासी अस्मिता का संकट[1]
  • दलित-चेतना साहित्यिक और सामाजिक सरोकार
  • दलित हस्तक्षेप

उपन्याससंपादित करें

  • सीता मौसी

आत्मकथासंपादित करें

  • आपहुदरी- यह उनकी आत्मकथा है।
  • हादसे-आत्मकथा2

संपादनसंपादित करें

  • युद्धरत आम आदमी- रमणिका गुप्ता द्वारा संपादित यह त्रैमासिक पत्रिका है।

संदर्भसंपादित करें

  1. रमणिका, गुप्ता (२०१५). आदिवासी अस्मिता का संकट. नई दिल्ली: सामयिक प्रकाशन.