मुख्य मेनू खोलें

रसेश्वर प्राचीन भारत का एक शैव दार्शनिक सम्प्रदाय था जिसका जन्म प्रथम शताब्दी ईसवी में हुआ था। यह सम्प्रदाय शरीर को अमर बनाने के लिए पारे के प्रयोग का सुझाव और समर्थन करता था। यह सम्प्रदाय रसार्णव, रसहृदय, रसेश्वरसिद्धान्त आदि ग्रन्थों पर आधारित था जिनके रचयिता गोविन्द भागवत और सर्वज्ञ रामेश्वर थे।

रसेश्वर महादेव की स्थापनासंपादित करें

आधुनिक काल में भी रसेश्वर महादेव मूर्ति की स्थापना प्राण प्रतिष्ठा पूजा के साथ की जाती है जिसमें क्रमश: अलग-अलग दिन जलाधिवास, अन्नाधिवास, स्नपन, नगर भ्रमण , शैयाप्राण प्रतिष्ठा की रस्मों को पूरा किया जाता है। [1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें