डॉक्टर राजबली पाण्डेय एक भारतीय लेखक, जिन्होंने हिंदू संस्कारों और वेदों के सामाजिक-धार्मिक अध्ययन पर अनेक पुस्तकें लिखीं।

राजबली पाण्डेय
जन्म 07 मई 1907
करौनी गाँव, रुद्रपुर, उ.प्र.
मृत्यु 6 जून 1971(1971-06-06) (उम्र 64)
वाराणसी, भारत
स्मारक समाधि वाराणसी, भारत
राष्ट्रीयता भारत
नागरिकता भारत
शिक्षा बी.ए.(प्रतिष्ठा) संस्कृत (1931)
एम.ए. (1933)
डी.लिट् (1936)
शिक्षा प्राप्त की कला संकाय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
सक्रिय वर्ष 1930–71
गृह स्थान वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत
अंतिम स्थान वाराणसी, भारत

जीवनसंपादित करें

डॉ. राजबली पाण्डेय ने अपने जीवन की शुरुआत गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित "कल्याण" के संपादक और रामकृष्ण डालमिया की पुत्री रमाबाई के ट्यूटर के रूप में की थी। उन्हें 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में नियुक्त किया था। उन्हें तत्कालीन उपकुलपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा रीडर के रूप में पदोन्नत किया गया। उन्हें 1952 में कॉलेज ऑफ इंडोलॉजी (भारती महाविद्यालय) के प्रमुख और प्राचार्य के रूप में नियुक्त किया गया था। राजनीतिक दबाव के कारण[1] उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय छोड़ दिया और प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के प्राचार्य और अध्यक्ष के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (जबलपुर विश्वविद्यालय) से जुड़ गए।

संदर्भसंपादित करें

  1. ए सर्वे ऑफ दि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी,. संशोधन विधेयक. 1964. पृ॰ 9.