राजस्थानी रंगमंच पर अब तक जितने भी नाटकों का मंचन हुआ है या तो वे गुमनामी की चादर ओढ़े हुए है या उन्हें दर्शकों तक पहुँचाने में असमर्थता प्रमुख कारण रहा हो... यह बात दीगर है की राजस्थानी कला संस्कृति अपने आप में समृद्ध है।.. फिर भी इस रेगिस्तान में स्व. श्री प्रभाकरजी मंडलोई लिखित एक नाटक "सासू आच्छ्यो जायो ऐ" पानी की एक बूंद का सा एहसास करा रहा है।.. निर्माता/निर्देशक/अभिनेता राजेश प्रभाकर मंडलोई पूरे तन-मन-धन से पूरी निष्ठा के साथ इस नाटक को पूरे विश्व में, राजस्थानी रंगमंच का पहला "सिल्वर जुबिली" हिट नाटक का दर्जा दिलाने में सफलता पाई है।... अब भी इस "सासू आच्छ्यो जायो ऐ" नाटक दर्शकों का मन जितने में कामयाब होता हुआ अपनी "गोल्डन जुबिली" की ओर बढ़ रहा है।... जो पूरे विश्व में राजस्थानी भाषा का एक मील का पत्थर बनेगा ....