मंत्री पद की शपथ के लिये व्यक्ति को दोनो सदनो में से किसी की सदन का सदस्य होना अनिवार्य है अथवा 6 महिने के अन्दर किसी भी सदन का सदस्य बनना पडता है ।

राज्यमंत्री एक केबिनेट मंत्री के सहायक के रूप में कार्य करता है और कैबिनेट के मीटिंग में भाग नही ले सकता परन्तु सुविधाये उसे मंत्री वाली ही मिलती है जबकि स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री विभाग का स्वतंत्र प्रभारी होता हो और जरूरत पडने पर कैबिनेटकी मीटिंग में अपनी बात रख सकता है ।

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राज्य मंत्री (अंग्रेजी- मिनिस्टर ऑफ स्टेट) विभिन्न देशों की सरकारों में विभिन्न स्तर के पदों के लिए प्रयुक्त पदनाम है। कहीं यह स्वतंत्र एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंत्री पद के लिए प्रयुक्त होता है तो कहीं कनिष्ठ मंत्रीपद के लिए। कहीं-कहीं यह सरकार के सर्वोच्च पद के लिए प्रयुक्त होता है। भारत में यह त्रीस्तरीय मंत्रीमंडल में प्रधानमंत्री तथा कैबिनेट मंत्री के बाद तीसरे स्तर का मंत्रीपद है।भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यमंत्री स्वतंत्र भी हो सकता है और केबिनेट मंत्री के सहायक के रुप में भी कार्य कर सकता है।