इन्हे बस्तर (छत्तीसगढ़) का गांधी कहा जाता है। इनसे प्रभावित होकर पं.जवाहर लाल नेहरू ने उन्हे भारतीय संविधान सभा का सदस्य बनाया। इन्हे कांकेर जिला जनपद सभा का प्रथम अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त है। सन 1950मे डॉ॰ रामप्रसाद पोटाई को कांकेर का प्रथम मनोनीत सांसद बनाया गया।

1950 ई. में ली गई ठाकुर रामप्रसाद पोटाई की तस्वीर
सन् 1950 ई. में खींची गई ठाकुर रामप्रसाद पोटाई की ग्रुप फोटो (तीसरी पंक्ति में दाहिने से तीसरे एवं बांये से बारहवें)[1]

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षासंपादित करें

 
2018 में भारतीय स्टाॅम्प में छपा हिसलाॅप काॅलेज नागपुर, मध्यप्रांत एवं बरार (वर्तमान में महाराष्ट) की तसवीर [1]

ठाकुर रामप्रसाद पोटाई, का जन्म साधन संपन्न परिवार में 1923 ई. में कांकेर तहसील के कन्हारपुरी ग्राम में हुआ था। इनके बचपन का नाम फरसो था। इनके पिता घमसान सिंह पोटाई कांकेर रियासत के संपन्न मालगुजार थे। इनकी माता का नाम दुलारी बाई पोटाई था। ठाकुर रामप्रसाद पोटाई की शिक्षा पर उनके पालकों द्वारा विषेश ध्यान दिया गया। इनकी प्रारंभिक शिक्षा कन्हारपुरी के खानगी स्कूल में तथा हाईस्कूल की शिक्षा 1925 ई. से कांकेर के क्राफर्ड हाई स्कूल वर्तमान में नरहरदेव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कांकेर छत्तीसगढ़ से प्राप्त की थी। बीए और वकालत की शिक्षा राबर्टसन काॅलेज जबलपुर और हिस्लाप काॅलेज नागपुर से प्राप्त की। उस समय नागपुर मध्य प्रांत की राजधानी होने के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र भी था। पोटाई जी अपने काल के बस्तर अंचल के प्रथम आदिवासी नवयुवक हुए जिन्होने वकालत की शिक्षा ग्रहण की थी। वे एक लम्बी दौड़ और उंची कूद के अच्छे एथलीट भी थे।  

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

 
सन् 1950 ई. में संविधान निमात्रि सभा के सामुहिक फोटो में ठाकुर रामप्रसाद पोटाई (लाल घेरे में) [2]

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

  1. Doctor, Vikram. "India@70: The people who wrote the Constitution of India". The Economic Times. अभिगमन तिथि 2021-05-07.
  2. "Group Photos -Constituent Assembly | Department of Justice | Ministry of Law & Justice | GoI". doj.gov.in. अभिगमन तिथि 2021-05-07.