पुनः क्रय अनुबंध अथवा रिपर्चेज एग्रीमेंट (Repurchase agreement) अथवा रेपो सामान्यतः सरकारी प्रतिभूतियों से लघु-अवधि उधार को कहते हैं। इसमें विक्रेता निवेशकों को विचाराधीन प्रतिभूतियों का विक्रय करता है और उसके कुछ दिनों बाद थोड़े अधिक मूल्य के साथ पुनः क्रय कर सकता है। ●रेपो दर, वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंको को "सरकारी प्रतिभूतियों"के पुनर्खरीद की शर्त पर अल्पकालिक अवधि के लिए धन उधार देता है। रेपो रेट के अंतर्गत बैंक RBI से NDTL के 1% तक धन उधार ले सकते हैं। LTRO(दीर्घकालिक रेपो ऑपरेशन) के अपवादों को छोड़ दिया जाए तो रेपो रेट से ओवर-नाईट से लेकर अधिकतम 28 दिनों तक धन उधार लिया जा सकता है। ●रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI ,सरकारी प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद की शर्त पर वाणिज्यिक बैंको की अधिक तरलता के धन को जमा करता है। ध्यातव्य है कि RBI रिवर्स रेपो रेट पर वाणिज्यिक बैंको के धन को जमा करके ब्याज देता है न कि बैंको से ऋण लेता है। ●रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट मौद्रिक नीति के चलनिधि समायोजन सुविधा के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके द्वारा ही तरलता का प्रबंधन किया जाता है। ●रेपो रेट का सम्बंध ब्याज दरों से है जबकि रिवर्स रेपो रेट का सम्बंध तरलता से है।

रिजर्व बैंक इंडिया के लिए रेपो का उपयोगसंपादित करें

भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति को कम या अधिक करने के लिए रेपो और रिवर्स रेपो को काम में लेता है। आरबीआई वाण्यिजिक बैंकों को जब उधार देता है तो उसे रेपो दर (repo rate) कहा जाता है। मुद्रास्फीति के समय, आरबीआई रेपो दर को बढ़ा देता है जिससे बैंकों द्वारा धन उधार लेने और अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति कम होने को हतोत्साहित किया जाता है।[1] October 2019 के अनुसार आरबीआई रेपो दर 5.15% कर दिया है

रिवर्स रेपो रेट रिवर्स रेपो रेट को घटकर 4.90% हो गया है. रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में रिवर्स रेपो रेट काम आती है. नकदी बाजार में जब भी बहुत ज्यादा दिखाई देती है तो आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, जिससे की बैंक ज्यादा ब्याज कमाने हेतु अपनी रकमे उसके पास जमा करा दे.

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Definition of 'Repo Rate'" ['रेपो दर' की परिभाषा]. द इकॉनोमिक टाइम्स (अंग्रेज़ी में). मूल से 31 जुलाई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 जून 2019.