रीवा भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का नगर एवं संभाग है याह गड़रिया समाज से पाल बघेल रियासत ने राज किया हे जो आज उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश बघेल खंड नाम से जाना जाता है यह इलाहाबाद नगर से १३१ किलोमीटर दक्षिण स्थित प्रमुख नगर है। यह शहर मध्य प्रदेश प्रांत के विंध्य पठार का एक हिस्से का निर्माण करता है और टोंस,बीहर.,बिछिया नदी एवं उसकी सहायता नदियों द्वारा सिंचित है।

रीवा
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश  भारत
राज्य मध्य प्रदेश
जनसंख्या
घनत्व
23,65,106 (2011 के अनुसार )
• 361/किमी2 (935/मील2)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
6,240 km² (2,409 sq mi)
• २७५ मी. मीटर

निर्देशांक: 24°32′N 81°18′E / 24.53°N 81.3°E / 24.53; 81.3

इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश राज्य, पश्चिम में सतना एवं पूर्व तथा दक्षिण में सीधी जिले स्थित हैं। इसका क्षेत्रफल २,५०९ वर्ग मील है। यह पहले एक बड़ी बघेल वंश की रियासत थी। यहाँ के निवासियों में गोंड एवं कोल ब्राह्मण विभिन्न क्षत्रिय वैश्य जाति के लोग भी शामिल हैं जो पहाड़ी भागों के साथ-साथ मुख्य नगर में रहते हैं। जिले में जंगलों की अधिकता है, जिनसे लाख, लकड़ी एवं जंगली पशु प्राप्त होते हैं। रीवा के जंगलों में ही सफेद बाघ की नस्ल पाई गई हैं। जिले की प्रमुख उपज धान है। जिले के ताला नामक जंगल में बांधवगढ़ का ऐतिहासिक किला है।

जब गुजरात से सोलंकी राजपूत मध्य प्रदेश आयें तो इनके साथ कुछ परिहार राजपूत एवं कुछ मुस्लिम भी आये परन्तु कुछ समय पश्चत सोलांकी राजा व्याघ्र देव ने सोलांकी से बघेल तथा परिहार से वरग्राही (श्रेष्ठता को ग्रहण करने वाला) वंश की स्थापना की। बघेल तथा वरग्राही परिहार आज बड़ी संख्या में संपूर्ण विंध्य मैं पाए जाते हैं जो प्रारंभ से एक दूसरे के अति विश्वस्त हैं। प्राचीन इतिहास के अनुसार रीवा राज्य के वर्ग्राही परिहारो ने रीवा राज्य के लिए अनेक युद्ध लड़े जिनमें नएकहाई युद्ध, बुंदेलखंडी युद्ध, लाहौर युद्ध, चुनार घाटी मिर्जापुर युद्ध, कोरिया युद्ध, मैहर युद्ध, कृपालपुर युद्ध, प्रमुख हैं।

बघेल वंश की स्थापना व्याघ्र देव ने की जिसके कारण इन्हें व्याघ्र देव वंशज भी कहा जाता है। चूँकि इन दोनों वंश की स्थापना होने के बाद इन दोनों राजपूतो का ज्यादा विस्तार नही हो पाया जिसके कारण इन वंशो के बारे में ज्यादा जानकरी प्राप्त नही हुई। इन्हें अग्निकुल का वंशज माना जाता है।

भूतपूर्व रीवा रियासत की स्थापना लगभग १४०० ई. में बघेल राजपूतों द्वारा की गई थी। मुग़ल सम्राट अकबर द्वारा बांधवगढ़ नगर को ध्वस्त किए जाने के बाद रीवा महत्त्वपूर्ण बन गया और १५९७ ई, में इसे भूतपूर्व रीवा रियासत की राजधानी के रूप में चुना गया। सन १९१२ ई. में यहाँ के स्थानीय शासक ने ब्रिटिश सत्ता से समझौता कर अपनी सम्प्रभुता अंग्रेज़ों को सौंप दी। यह शहर ब्रिटिश बघेलखण्ड एजेंसी की राजधानी भी रहा।यहाँ विश्व का सबसे पहला सफ़ेद शेर मोहन पाया गया। जिसकी मृत्यु हो चुकी है।

रीवा का अरविन्द आश्रम

रीवा जिले के निकट 13 किलोमीटर (निपानिया-तमरा मार्ग) महाराजा मार्तण्ड सिंह बघेल व्हाइट टाइगर सफ़ारी एवं चिड़ियाघर मुकुंदपुर का निर्माण किया गया है जहाँ सफ़ेद शेरों को संरक्षण दिया जा रहा है।

रीवा जिले में बघेली एक प्रमुख भाषा है। हाल ही में यहाँ पर कृष्णा राज कपूर ऑडीटोरियम का निर्माण कराया गया है ।

यातायात'संपादित करें

 
इन्दौर-रीवा रेलमार्ग

रीवा रेल मार्ग से देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा है जिससे की रीवा आसानी से पंहुचा जा सकता है। जैसे- दिल्ली , राजकोट , सूरत,नागपुर,जबलपुर,कानपुर,ईलाहाबाद,इंदौर,भोपाल,मैहर,बिलासपुर इत्यादि।

सड़क मार्ग :- रीवा सड़क मार्ग से निम्न शहरों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। और नियमित बसों का संचालन:- भोपाल,इंदौर,जबलपुर,नागपुर,बिलासपुर,रायपुर,ग्वालियर,इलाहाबाद,बनारस,अमरकंटक.शहडोल,मैहर, सतना आदि शहरों से है।

रेलमार्ग- रीवा रेेेेल्वे स्टेशन हैं जहा सेे भोपाल, इंदौर,दिल्ली,जबलपुर,बिलासपुर,चिरमिरी,राजकोट,नागपुर केे लिए ट्रेन चलती हैै|

वायुमार्ग- रीवा में एक हवाईपट्टी है जहाँ से भोपाल के लिए फ्लाइट चलती है इसको हवाई अड्डा बनाने के घोषणा हो चुकी है जिससे विंध्य क्षेत्र भी व्यापार और पर्यटन स्थलों को टूटिस्ट आसानी से दर्शन कर सकेंगे

रीवा की भौंगोलिक स्थितिसंपादित करें

भारत के हृदय स्थल मे बसे मध्यप्रदेश के उत्तरी-पूर्व मे स्थित रीवा जिला एक त्रिभुज के समान इसका आकार हैं, या जिला मध्यप्रदेश का एक सीमांत क्षेत्र हैं। यह जिला मध्यप्रदेश राज्य के पूर्वोत्तर भाग मे लगभग 24.18 अंश से 25.12 अंश उत्तरी अक्षांश तथा 81.02 अंश से 82.20 अंश पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित हैं। रीवा जिले के उत्तरी क्षेत्र मे उत्तरप्रदेश का प्रयागराज और बांदा जिला हैं तथा पुरवुततार क्षेत्र मे मिर्जापुर जिला स्थित हैं। रीवा के दक्षिण मे शहडोल व पश्चिम मे रीवा संभाग का सतना जिला मौजूद हैं। जबकि दक्षिण-पूर्व मे सीधी एवं सिंगलौरी नामके जिले मौजूद हैं।

रीवा जिले की अधिकतम लंबाई पूर्व से पश्चिम 125 किमी हैं तथा उत्तर से दक्षिण रीवा की लंबाई 96 किमी हैं। यह क्षेत्र दक्षिण दिशा मे कैमोर की पहाड़ियो से घिरा हुआ हैं तथा जिले के मध्य से विंध्याञ्चल की श्रेणियाँ गुजरती हैं।

 

Source- हमारा रीवा, रीवा का भौंगोलिक क्षेत्र

चित्र दीर्घासंपादित करें

रीवा का सफ़ेद बाघ ,कयोति जल प्रपात एवं बहुति जल प्रपात ।

सन्दर्भसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें