लक्ष्मीचंद जैन का जन्म 1909 ईं में नौगाँव में हुआ। अंग्रेज़ी तथा संस्कृत में एम.ए. किया। कुछ दिनों तक दिल्ली के रेडियो केंद्र से संबद्ध रहे। इसके बाद साहू जैन औद्योगिक प्रतिष्ठान और भारतीय ज्ञानपीठ में रहते हुए, दिल्ली प्रकाशनों के संपादक तथा नियोजक के पद पर कार्य किया। वे ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित 'ज्ञानोदय' मासिक पत्र के संपादक भी रहे। हिंदी के नये साहित्य के प्रकाशन तथा प्रसार में आपका योगदान महत्वपूर्ण है।

हिंदी के नये ढंग के गद्य-लेखकों में आपका नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। कई नये प्रकार के गद्य-माध्यमों का भी आपने प्रयोग किया है। 'ज्ञानोदय' के अंकों में प्रकाशित 'जो वे स्वयं न कह पाए' इसी प्रकार की रचनाएँ हैं। विभिन्न लेखकों के सहयोग से प्रस्तुत धारावाहिक उपन्यास 'ग्यारह सपनों का देश' की नियोजना भी आपने की। स्फुट विषयों पर लिखे गए निबंधों के संकलन 'काग़ज़ की किश्तियाँ' (1958 ई.) तथा 'नए रंग, नए ढंग' (1961 ई.) शीर्षक से प्रकाशित आपकी प्रमुख कृतियाँ हैं।[1]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. वर्मा, धीरेन्द्र (१९८५). हिन्दी साहित्य कोश भाग-२. वाराणसी, भारत: ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी, उ.प्र. पृ॰ 544. पाठ "editor: " की उपेक्षा की गयी (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया जाना चाहिए (मदद)