सामान्यतः किसी एक लेखन पद्धति में लिखे जाने वाले शब्द या पाठ को किसी अन्य लेखन पद्धति में लिखने को लिप्यन्तरण कहते हैं। लिप्यन्तरण = लिपि + अन्तरण। उदाहारण के लिये जापानी में लिखा है :ひらがな

इसको देवनागरी में इस तरह लिखा जाता है : हिरागाना

लिप्यन्तरण के लिये नियमों का एक समुच्चय निर्धारित किया गया होता है। ये नियम इस बात का ध्यान रखते हुए बनाये जाते हैं कि -

  • लिप्यन्तरित पाठ से पुनः मूलपाठ बिना किसी त्रुटि के प्राप्त किया जा सके।
  • नियम सरल एवं सहज हों ताकि एक साधारण व्यक्ति बी इन्हें याद करके इनका आसानी से व्यवहार कर सके।

भाषा विज्ञान की दृष्टि से लिप्यन्तरण, दो लेखन पद्धतियों के मध्य एक प्रतिचित्रण है।

उदाहरण:

मेरा नाम सुरेश है। (देवनागरी)

મેરા નામ સુરેશ હૈ। (गुजराती)

merā nām sureś hai (IAST)

মেরা নাম সুরেশ হৈ। (बाङ्ला)

ମେରା ନାମ ସୁରେଶ ହୈ। (ओड़िया)

meraa naam suresh hai. (iTrans)

merA nAma sureza hai| (हार्वर्ड-क्योटो)

merä näma sureça hai| (बलराम)


merà nàma sure÷a hai| (सी एस एक्स)

mer€ n€ma surea hai| (X-Sanskrit)

लिप्यंतरण की आवश्यकता एवं महत्व

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कुछ प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

  • किसी प्राचीन एवं कालातीत लेखन पद्धति या लिपि में लिखी चीज को किसी आधुनिक लिपि या अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला में परिवर्तित करके उसे जीवन्त बनाना,
  • आइपीए या किसी अन्य वैज्ञानिक लिपि में लिखित चीज को किसी प्रचलित (व्यावहारिक) लिपि में परिवर्तन ताकि उसे आसानी से समझा जा सके।
  • किसी व्यवहारिक लिपि में लिखी चीज को आइपीए या किसी अन्य मानक वैज्ञानिक लिपि में परिवर्तन ताकि लोग उस शब्द का सही उच्चारण समझ सकें।
  • एक व्यावहारिक लिपि से दूसरी व्यावहारिक लिपि में परिवर्तन ताकि अपनी लिपि की सहायता से दूसरी भाषा सीखि जा सके।
  • किसी टंकण यन्त्र या अभिकलित्र पर किसी लिपि में लिखने की सुविधा न हो तो दूसरी लिपि (जिसमें यह सुविधा उपलब्ध हो) का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिये मोबाइल फोन पर देवनागरी में एस एम एस की सुविधा उपलब्ध न होने पर हिन्दी सन्देश को रोमन में लिखकर भेजा जाता है।
  • लिप्यन्तरण उनके लिये भी उपयोगी होता है जो कोई भाषा तो बोलना और समझना जानते हैं किन्तु उस भाषा की लिपि को नहीं वाच सकते।
  • कुछ भाषाएँ कई लिपियों में लिखी जाती हैं।
  • किसी एक भाषा में लिखते समय किसी दूसरी भाषा के शब्द का परिचय देने के लिये
  • लिप्यन्तरण का प्रयोग कभी-कभी साधारण कूटलेखन के लिये भी किया जाता है।

लिप्यन्तरण के प्रकार

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  1. ध्वन्यात्मक लिप्यन्तरण
  2. मार्फोलोजी पर आधारित - स्रोत भाषा के किसी वर्ण के लिये दूसरी भाषा के उस वर्ण का उपयोग किया जाता है जो दिखने में कुछ समानता रखता हो।
  3. मिश्रित - उपरोक्त दोनों विधियों का मिश्रण
  4. कूटन (कोडिंग) - स्रोत भाषा के वर्णों के लिये लक्ष्य भाषा के वर्ण यादृच्छ्या (randomly रेण्ड्मली ) चुन लिये जाते हैं। यह मशीनों द्वरा लिखनपढ़ने के लिये अधिक उपयुक्त है।
  5. स्वछन्द (Bizzarre बिज़ारे ) - बिना किसी सख्त नियम का पालन करते हुए स्रोत भाषा को लक्ष्य भाषा के वर्णों द्वारा लिखना।

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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भारतीय एवं दक्षिण एशियाई

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(Kannada), മലയാളം (Malayalam), ଓଡ଼ିଆ (Oriya), ਗੁਰਮੁਖੀ (Punjabi), संस्कृतम् (Sanskrit (Harvard-Kyoto scheme)), தமிழ் (Tamil), తెలుగు (Telugu), ગુજરાતી (Gujarati)

पूर्व यूरोपीय

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लेख एवं दस्तावेज

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