लैक्टोज़ की मात्रा के कारण की वजह से ही कई बार बच्चे और वयस्क दूध पचा नहीं पाते हैं, इसे लैक्टोस इंटोलरेंस कहते हैं। दूध का सेवन बच्चों के लिए परमावश्यक है क्योंकि यह कैल्शियम का प्रमुख स्रोत है। इसमें प्रोबायोटिक जीवाणु सहायक रहते हैं।[1]

लैक्टोस दो सरल शर्करा से बनता है

सन्दर्भसंपादित करें

  1. प्रोबायोटिक दुग्ध उत्पादों के फायदे[मृत कड़ियाँ]। बिज़्नेस भास्कर। डॉ॰रन साघा खन्ना। २४ मई २००९

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