सत्पुरुष वो है जो स्वम को स्वम मे ढूंढे, और परमेश्वर को स्व सतकर्म मे ढूंढे वचनामृत स्वामीनारायण सम्प्रदाय का एक मूल ग्रंथ है।[1]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. राजीव रंजन (८ अप्रैल २०११). "अध्यात्म की ज्योति से लोगों का अज्ञान मिटाया". हिन्दुस्तान. अभिगमन तिथि २४ मार्च २०१३.