यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित है। मान्यता है कि यहां पर तमसा नदी के किनारे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में माता सीता वनवास के दौरान रही थीं। यहीं पर लव कुश का जन्म हुआ था और यहीं पर माता सीता धरती में समाई थीं। हालांकि कुछ और भी जगहें हैं जिनके बारे में ऐसी ही मान्यता है। वनदेवी के पक्ष में जो तर्क है वो यह है कि वाल्मीकि रामायण में उनके आश्रम को तमसा नदी के तट पर बताया गया है और ये तमसा नदी यहीं पर बहती है। जबकि कानपुर के बिठूर, बागपत के बलैनी में भी सीता माता के वनवास काटने के दावे किए जाते हैं। उत्तराखंड के रामनगर में जिम कार्बेट पार्क के पास सीतावनी मंदिर भी है, जहां पर वो तालाब है जिसके बारे में मान्यता है कि वहीं पर माता सीता धरती में समाई थीं।